रांची
भारत के माननीय मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई पर सुप्रीम कोर्ट परिसर में एक अधिवक्ता द्वारा जूता फेंके जाने की घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है। इस घिनौनी और असंयमित हरकत पर पूर्व सांसद फुरकान अंसारी ने गहरी पीड़ा और तीव्र असहमति व्यक्त की है।
फुरकान अंसारी ने कहा, “यह केवल माननीय मुख्य न्यायाधीश और उनके साथियों का अपमान नहीं है, बल्कि भारत की न्यायपालिका और संविधान की गरिमा पर हमला है। सर्वोच्च न्यायालय पर ऐसा व्यवहार पूरी तरह अक्षम्य है।”
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से तत्काल कार्रवाई की मांग करते हुए कहा, “प्रधानमंत्री को इस पूरे प्रकरण का स्वतः संज्ञान लेकर दोषी अधिवक्ता पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। यह केवल एक व्यक्ति की गलती नहीं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट की प्रतिष्ठा को गिराने का सोचा-समझा प्रयास है। प्रधानमंत्री की अब तक की चुप्पी देश के लिए चिंताजनक है।”

पूर्व सांसद ने आगे कहा, “यह शर्मनाक घटना उस समय हुई जब माननीय चीफ जस्टिस ने कहा था कि ‘देश बुलडोज़र से नहीं, कानून से चलेगा।’ यह केवल एक न्यायाधीश का अपमान नहीं, बल्कि पूरी न्यायपालिका और संवैधानिक व्यवस्था का अपमान है। देश के हर नागरिक को इसका विरोध करना चाहिए ताकि लोकतंत्र की नींव कमजोर न हो।”
फुरकान अंसारी ने यह भी कहा कि भाजपा के शासन में संवैधानिक संस्थाओं के अपमान की घटनाएँ अब आम होती जा रही हैं, जो लोकतंत्र के लिए खतरे का संकेत हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी को भी कानून और व्यवस्था से ऊपर समझने की अनुमति नहीं दी जा सकती। दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करके एक मजबूत उदाहरण पेश किया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुँचाने की हिम्मत न करे।
