द फॉलोअप डेस्क
बांग्लादेश में दीपूचंद्र दास की निर्मम हत्या को लेकर पूरे देश में आक्रोश का माहौल है। इस घटना की आग से गिरिडीह भी अछूता नहीं रहा। सोमवार को गिरिडीह के विभिन्न हिंदू संगठनों ने इस हत्या के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। झंडा मैदान से टावर चौक तक आक्रोश मार्च निकाला गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। आक्रोश मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों ने “बांग्लादेश मुर्दाबाद”, “हिंदुओं पर अत्याचार बंद करो” जैसे नारे लगाए। टावर चौक पहुंचने पर बांग्लादेश के प्रधानमंत्री का पुतला दहन किया गया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि बांग्लादेश में लगातार अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है और दीपूचंद्र दास की हत्या उसी कड़ी का एक गंभीर उदाहरण है। मार्च में शामिल लोगों ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि दीपू दास की हत्या केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि मानवता और लोकतांत्रिक मूल्यों की हत्या है। उन्होंने आरोप लगाया कि बांग्लादेश सरकार अल्पसंख्यकों की सुरक्षा करने में पूरी तरह विफल रही है।
प्रदर्शनकारियों ने भारत सरकार से इस मामले में सख्त रुख अपनाने की मांग की। सभी ने एक स्वर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया कि बांग्लादेश सरकार पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव बनाया जाए और इस हत्या का जोरदार विरोध देश की ओर से किया जाए। साथ ही दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित कराने की मांग भी की गई। आक्रोश मार्च के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। पुलिस प्रशासन ने स्थिति पर नजर बनाए रखी, जिससे प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सका। हिंदू संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार नहीं रुके, तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज किया जाएगा। इस घटना को लेकर गिरिडीह सहित पूरे देश में आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है।
