द फॉलोअप डेस्क
कार्य विभागों में ऊर्जा विभाग की अलग अहमियत है। बिजली व्यवस्था चरमराई तो किसी भी समय किसी भी राज्य में अंधेरा छा सकता है। लेकिन झारखंड के ऊर्जा विभाग में पिछले चार माह से शीर्ष पद पर अंधेरा है। ऊर्जा विभाग में सचिव नहीं हैं। झारखंड ऊर्जा विकास निगम के सीएमडी का पद रिक्त है। झारखंड बिजली वितरण निगम के एमडी का पद रिक्त है। लेकिन इतने महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति नहीं हो रही है। परिणाम यह है कि बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक नहीं हो पा रही है। बिजली के क्षेत्र में सुधार या किसी बड़े आधारभूत संरचना निर्माण को लेकर निर्णय नहीं लिए जा रहे हैं। यहां मालूम हो कि 30 सितंबर 2025 को अविनाश कुमार को राज्य का मुख्य सचिव बनाया गया था। इसके अलावा उन्हें मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव की भी अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गयी थी। साथ ही झारखंड भवन दिल्ली के अपर स्थानिक आयुक्त की भी उन्हें अतिरिक्त जिम्मेदारी थी और है। इससे पूर्व अविनाश कुमार के ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव थे। इसके अलावा झारखंड ऊर्जा विकास निगम के सीएमडी, बिजली वितरण निगम के एमडी के भी अतिरिक्त प्रभार में थे। लेकिन मुख्य सचिव बनाए जाने के बाद उनका ऊर्जा विभाग से जुड़े सभी अतिरिक्त प्रभार वापस ले लिए गए। ऊर्जा विभाग के सचिव या ऊर्जा विकास निगम के सीएमडी पद पर किसी की नियुक्ति नहीं की गयी। हालांकि यह अलग बात है कि किसी विभाग का सचिव नहीं रहने पर उसकी जिम्मेदारी मुख्य सचिव को ही होती है। इस कारण मुख्य सचिव की हैसियत से ऊर्जा विभाग के अत्यावश्यक या महत्वपूर्ण निर्णय उनके ही माध्यम से हो रहा है।

ऊर्जा विभाग के 160 करोड़ का एफडी गायब, सरयू राय ने की जांच की मांग
इधर झारखंड के ऊर्जा विभाग से चौंकानेवाली खबर निकली है। जदयू विधायक सरयू राय ने कहा है कि ऊर्जा विभाग की ₹160 करोड़ की एफ़डी ग़ायब है! विभाग ने यह एफ़डी केनारा बैंक एवं एक अन्य बैंक में किया था। मैच्युरिटी डेट आने पर अधिकारी जमा की गयी निधि निकालने बैंक गए तो बैंकों ने कहा कि उनके यहां विभाग की कोई एफ़डी शेष नहीं बची है। सरयू राय ने मुख्यमंत्री से पूछा है कि पैसा किसने निकाला? इसकी जांच होनी चाहिए।
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टेंडर और कमीशन में उलझने की बजाय सरकार खजाने पर ही डाका डाल रहीः बाबूलाल मरांडी
सरयू राय की मांग पर प्रतिपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर आरोप लगाया है कि टेंडर मैनेज करने के और कमीशन की उगाही में उलझने की बजाय सरकार ऊर्जा विभाग के खजाने पर ही सीधे डाका डाल रही है। उन्होंने सरयू राय को टैग करते हुए लिखा है- जी, आप दिवंगत सुशील मोदी जी के साथ मिलकर चारा घोटाले का उद्भेदन करने वालों में अग्रणी रहे हैं और लालू प्रसाद यादव के काले कारनामों को देश के सामने लाने में आपकी अहम भूमिका रही है। आप वित्तीय अनियमितताओं की बारीकियों को भली-भांति समझते हैं। चारा घोटाले में जिस तरह कोषागार से फर्जी निकासी की गई थी, ठीक उसी तर्ज पर आज झारखंड के ऊर्जा विभाग से भी अवैध निकासी की जा रही है। JBVNL के खातों में जमा होने वाले बिजली बिलों पर मिलने वाला ब्याज तक गबन कर लिया गया है।
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इसके अलावा बिजली बिल के ब्याज समायोजन में गंभीर गड़बड़ी सामने आई है। ऑडिट रिपोर्ट में भी 21.51 करोड़ रुपये का कोई स्पष्ट लेखा-जोखा नहीं मिल रहा है। इतना ही नहीं, पेयजल विभाग से भी खाते के माध्यम से 23 करोड़ रुपये निकाल लिए गए और संयोग देखिए कि ऊर्जा विभाग स्वयं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के अधीन है। क्या यह संभव है कि किसी विभाग से अरबों रुपये की अवैध निकासी हो जाए और विभागीय मंत्री को इसकी जानकारी न हो? यदि यह निकासी मुख्यमंत्री की जानकारी में हुई है, तो यह सीधा सत्ता के संरक्षण में भ्रष्टाचार का मामला है। और यदि जानकारी में नहीं हुई, तो यह सरकार की पूर्ण विफलता को दर्शाता है।

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