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बहुचर्चित वन भूमि घोटाले में IAS विनय चौबे की जमानत पर सुनवाई पूरी, फैसला सुरक्षित

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हजारीबाग 

राज्य में सुर्खियों में रहे बहुचर्चित वन भूमि घोटाले के मुख्य आरोपियों में शामिल आईएएस अधिकारी विनय चौबे की जमानत याचिका पर आज हजारीबाग एसीबी की विशेष अदालत में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। विनय चौबे हजारीबाग के तात्कालीन उपायुक्त रहे थे और उन्हीं के कार्यकाल के दौरान इस कथित घोटाले के सामने आने के बाद निगरानी विभाग द्वारा जांच शुरू की गई थी। वर्तमान में चौबे इसी मामले में न्यायिक अभिरक्षा में जेल में बंद हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए इस सुनवाई पर राज्यभर की निगाहें टिकी हुई थीं।

सोमवार को यह सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वितीय-सह-विशेष न्यायाधीश (निगरानी) आशा देवी भट्ट की अदालत में हुई, जहां अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष दोनों ने अपने-अपने तर्क मजबूती से पेश किए। अदालत में लगभग पूरे मामले की पृष्ठभूमि, एसीबी की जांच रिपोर्ट, केस डायरी में दर्ज बिंदु और जमानत आवेदन में दिए गए आधारों पर विस्तार से चर्चा हुई। सुनवाई के बाद अदालत ने कहा कि वह सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख रही है।

कोर्ट ने जमानत याचिका पर अंतिम आदेश की तारीख तीन दिसंबर निर्धारित की है। बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शंकर बनर्जी ने दलील देते हुए कहा कि उनके मुवक्किल इस मामले में बेगुनाह हैं और जांच एजेंसी ने तथ्यों का गलत व्याख्यान किया है। वहीं, अभियोजन पक्ष ने यह तर्क दिया कि मामले में कई महत्वपूर्ण साक्ष्य विनय चौबे की भूमिका की ओर इशारा करते हैं और उन्हें जमानत देने से जांच एवं मुकदमे की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। दोनों ही पक्षों की ओर से कई दस्तावेज और तर्क अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए गए।

सूत्रों के अनुसार यह पूरा मामला निगरानी वाद संख्या 11/25 से संबंधित है, जिसकी जांच निगरानी विभाग लंबे समय से कर रहा है। इस मामले में पहले भी विनय चौबे को रिमांड पर लिया गया था, जहां उनसे कई घंटे तक पूछताछ की गई थी। रिमांड के दौरान उनसे भूमि आवंटन, फाइल अनुमोदन, सरकारी भूमि के स्वामित्व परिवर्तन और संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों की भूमिका से जुड़े सवाल पूछे गए थे। विभाग का दावा है कि पूछताछ में कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं।

आरोप है कि हजारीबाग डीसी के रूप में कार्यरत रहते हुए विनय चौबे ने वन विभाग की भूमि को अवैध तरीके से परिवर्तित करने, गलत तरीके से स्वीकृति देने और सरकारी परिसंपत्तियों को निजी लाभ के लिए उपलब्ध कराने जैसी गतिविधियों में भूमिका निभाई थी। हालांकि बचाव पक्ष इन आरोपों से साफ इनकार करते हुए कहता है कि चौबे ने सभी प्रक्रियाएं नियमों के तहत की थीं और उनके खिलाफ लगाए गए आरोप राजनीतिक एवं प्रशासनिक द्वेष का परिणाम हैं।

विनय चौबे की ओर से जमानत आवेदन 14 नवंबर 2025 को दायर किया गया था। पहली सुनवाई 17 नवंबर को हुई, जहां अदालत ने अभियोजन पक्ष से केस डायरी तलब की थी। केस डायरी उपलब्ध होने के बाद अदालत ने इसे गंभीरता से पढ़ा और प्रत्येक बिंदु का अवलोकन किया। इसके बाद अभियोजन और बचाव पक्ष की बहस पर विचार करते हुए अदालत ने कहा कि आदेश देने से पहले उसे और समय चाहिए।

मामले की संवेदनशीलता और उच्च स्तर के आरोपों को देखते हुए यह जमानत याचिका न केवल कानूनी रूप से बल्कि प्रशासनिक स्तर पर भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। राज्य के अन्य जिलों के अधिकारियों, प्रशासनिक हलकों और राजनीतिक गलियारों में भी इस फैसले को लेकर चर्चा गहराई हुई है। तीन दिसंबर को आने वाला आदेश इस मामले की दिशा को काफी हद तक तय करेगा।


 

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