द फॉलोअप डेस्क, रांची:
झारखंड में प्रतियोगी भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल, प्रश्नपत्र से छेड़छाड़ और अनुचित साधनों के इस्तेमाल से जुड़े मामलों की सुनवाई अब रांची सिविल कोर्ट में गठित विशेष अदालत में होगी। इस अदालत का अधिकार क्षेत्र केवल रांची तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राज्य के किसी भी जिले में दर्ज ऐसे मामलों की सुनवाई भी इसी अदालत में की जाएगी।
विशेष अदालत का गठन झारखंड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों के नियंत्रण और रोकथाम के उपाय) अधिनियम, 2023 के तहत किया गया है। हाईकोर्ट के निर्देश और राज्य सरकार के विधि विभाग के आदेश के बाद रांची सिविल कोर्ट के प्रधान न्यायायुक्त ने यह व्यवस्था लागू की है। इसका उद्देश्य भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी से जुड़े मामलों की सुनवाई में तेजी लाना है।

ऑनलाइन परीक्षा में 25 हजार अभ्यर्थी हुए शामिल
मामले की सुनवाई के दौरान JSSC की ओर से बताया गया कि 27 जून से शुरू हुई कंप्यूटर आधारित ऑनलाइन परीक्षा में करीब 25 हजार अभ्यर्थी शामिल हुए थे। परीक्षा में कंप्यूटर के साथ छेड़छाड़ या बाहरी हस्तक्षेप का पता लगाने के लिए विशेष चिप लगाई गई थी। जांच के दौरान करीब 2,800 अभ्यर्थियों के कंप्यूटर में बाहरी प्रभाव के संकेत मिले।
इसके बाद इन अभ्यर्थियों की आंसर-की लॉक कर दी गई। आयोग ने संबंधित अभ्यर्थियों को नोटिस जारी कर पूछा कि कंप्यूटर में बाहरी प्रभाव के लिए उनकी कोई भूमिका थी या नहीं। अभ्यर्थियों से इस संबंध में शपथपत्र भी लिया गया। इसके बाद आयोग की ओर से दोबारा परीक्षा में शामिल होने के लिए भी नोटिस जारी किया गया।

राज्यभर के मामलों की होगी सुनवाई
विशेष अदालत में राज्य के किसी भी जिले में भर्ती परीक्षाओं से जुड़ी गड़बड़ी के तहत दर्ज मामले पेश किए जाएंगे। इनमें पेपर लीक, नकल, प्रश्नपत्र से छेड़छाड़ और परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करने वाले अन्य अनुचित तरीकों के मामले शामिल होंगे। नई व्यवस्था से ऐसे मामलों की सुनवाई एक निर्धारित अदालत में होने से कार्रवाई में तेजी आने की उम्मीद है।