द फॉलोअप डेस्क
झारखंड में DBT में भारी गड़बड़ी का मामला सामने आया है। छात्रवृति के नाम पर छह जिलों में एक करोड़ रुपये का फर्जी स्कॉलरशिप का वितरण किया गया। मामले को लेकर शिकायत मिलने पर जांच की गई। राज्य में जब क्रेंद सरकार की इस योजना की जांच की गई तो कई हैरान करने वाली बात सामने आई। योजना में जांचे गए जिलों के 60 प्रतिशत संस्थानों में फर्जी छात्रों को योजना का लाभ दिया गया। इतना ही नहीं एक ही छात्र को अलग-अलग योजनाओं का लाभ दिया गया है। वहीं आयोग्य छात्रों को भी छात्रवृति की राशि दे दी गई है। बता दें कि जिन 6 जिलों की जांच की गई थी उनमें रांची, चतरा, हजारीबाग, पूर्वी सिंहभूम, गोड्डा व पलामू शामिल है। इन 6 जिलों के जांच के बाद भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षा की रिपोर्ट तैयार की गई जिसमें इन सभी बातों का जिक्र किया गया है।

छात्रवृत्ति से अधिक की राशि दी गई
रिपोर्ट की मानें तो झारखंड में छात्रवृति के नाम पर छह जिलों में एक करोड़ रुपये का फर्जी स्कॉलरशिप का वितरण किया गया। करीब 60 प्रतिशत संस्थानों में फर्जी तरीके से भुगतान किया गया है। यह फर्जी वितरण उन संस्थानों से भी कर दिया गया जिन्होंने न तो खुद को राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल पर पंजीकृत किया था और न ही पोर्टल पर लॉग इन करने के लिए उपयोगकर्ता प्रमाण-पत्र या क्रेडेंशियल प्राप्त किए थे। एजी ने बताया कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग छात्रवृत्ति योजना का लाभ फर्जी लाभार्थी को दिया गया है। अयोग्य छात्रों को राशि दे दी गई है। कई जगहों पर छात्रवृत्ति से अधिक की राशि दी गई है। कक्षा से उत्तीर्ण हो चुके छात्रों को भी छात्रवृत्ति दी गई है। एक ही छात्र को अलग-अलग योजनाओं से भुगतान किया गया है। नमूना के तौर पर छह जिलों रांची, चतरा, हजारीबाग, पूर्वी सिंहभूम, गोड्डा व पलामू की जांच की गई।

छात्रों को शिक्षा ग्रहण करने में सहयोग करती है भारत सरकार
भारत सरकार ने छात्रों को शिक्षा ग्रहण करने में सहयोग के लिए डीबीटी कार्यक्रम सहित कई छात्रवृत्तियां प्रदान करती है। विशेष रूप से समाज के अलग रहने वाले तबके से आने वाले छात्र उच्च शिक्षा के लिए भारत सरकार छात्रवृत्ति प्रदान करती है। इतना ही नहीं विभिन्न योजनाओं में लोगों को मिलने वाले सरकारी लाभ का बेहतर बेहतर वितरण सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार ने डीबीटी (प्रत्यक्ष लाभ अंतरण) की पहल शुरू की है।