जमशेदपुर
जमशेदपुर का बर्मामाइंस थाना क्षेत्र रविवार रात गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंज उठा। थाना से महज 200 मीटर दूर कंटेनर यार्ड स्थित रेलवे साइडिंग के पास मुस्लिम बस्ती निवासी ठेकेदार आफताब आलम पर छह हमलावरों ने अंधाधुंध करीब 20 राउंड फायरिंग की।हमले में आफताब को पांच गोलियां लगी हैं। गंभीर रूप से घायल आफताब को तत्काल टाटा मुख्य अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे कोलकाता के अपोलो अस्पताल रेफर कर दिया गया। फिलहाल आफताब की हालत चिंताजनक बनी हुई है। स्थानीय लोगों के मुताबिक आफताब के पेट, पीठ और हाथ समेत शरीर के कई हिस्सों में गोलियां लगी हैं। उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। इस घटना ने बर्मामाइंस में तेजी से फैल रहे ब्राउन शुगर के कारोबार और उस पर प्रभावी कार्रवाई को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी कई गंभीर सवाल खड़े कर दिये हैं। दरअसल, जिस मुस्लिम बस्ती में शनिवार को पुलिस की पहल पर स्थानीय युवाओं ने नशे के खिलाफ जागरूकता रैली निकाली थी, उसी बस्ती के एक युवक को महज 24 घंटे के भीतर ब्राउन माफियाओं ने गोलियों का निशाना बना दिया गया।
घटनास्थल से मिले 13 खोखे और एक जिंदा कारतूस
जानकारी के अनुसार, रविवार रात आफताब आलम अपने चार दोस्तों मो. अमजद, सोनू, लड्डन और फिरोज के साथ कंटेनर यार्ड स्थित श्रमिक समिति कार्यालय के ऑफिस में बैठा था। तकरीबन 8.50 बजे सभी ऑफिस बंद कर घर लौटने के लिए अपनी-अपनी बाइक स्टार्ट कर रहे थे। तभी दो बाइकों पर सवार छह हमलावर वहां पहुंचे और तीन दिशाओं से आफताब पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। हमले में आफताब के हाथ, पीठ और पेट में कुल पांच गोलियां लगी। स्थानीय लोगों की मदद से उसे तत्काल टीएमएच पहुंचाया गया, जहां से उसे देर रात कोलकाता रेफर कर दिया गया। इस दौरान टीएमएच परिसर में भारी संख्या में घायल के परिजनों, परिचित और बस्ती वासियों की भीड़ जुटी रही। इधर, घटना की सूचना मिलते ही बर्मामाइंस थाना पुलिस मौके पर पहुंची। चूंकि घटनास्थल रेलवे क्षेत्र के अंतर्गत आता है, इसलिए जांच में जीआरपी को भी शामिल किया गया। पुलिस ने घटनास्थल से 13 खोखे और एक जिंदा कारतूस बरामद किया हैं। पुलिस का कहना है कि हमलावरों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है।

ब्राउन शुगर के अवैध कारोबार से जुड़ रही घटना की चर्चा
आफताब के दोस्तों के मुताबिक, कुछ दिन पहले बर्मामाइंस थाना प्रभारी ने मुस्लिम बस्ती के शांति समिति के युवकों के साथ बैठक कर क्षेत्र में बढ़ते ब्राउन शुगर के कारोबार पर चिंता जतायी थी। बैठक में युवाओं से बस्ती में नशा मुक्ति अभियान चलाने और लोगों को जागरूक करने की अपील की गयी थी। इसके बाद शनिवार को बस्ती के युवाओं ने हाथों में बैनर लेकर नशे के खिलाफ जागरूकता रैली निकाली। रैली के दौरान लोगों से ब्राउन शुगर और अन्य मादक पदार्थों से दूर रहने की अपील की गयी। अभियान का उद्देश्य बस्ती में नशे के खिलाफ सामाजिक माहौल तैयार करना था।

नशे के कारोबार के विरोध में निशाने पर आया आफताब!
घायल आफताब के दोस्त मो. अमजद का दावा है कि नशे के खिलाफ निकाली गयी रैली से ब्राउन शुगर का कारोबार करने वाले लोग नाराज थे और उसी का परिणाम यह हमला है। उनका आरोप है कि नशे के कारोबार का विरोध करने के कारण ही आफताब को निशाना बनाया गया। घटना के बाद प्रत्यक्षदर्शी फिरोज ने बताया कि वारदात को अंजाम देने को लेकर मुस्लिम बस्ती निवासी शहबाज उर्फ भोंदु, आयान, रेहान, उदय महतो व अन्य दो युवक वहां पहुंचे और आफताब पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दी। सभी बदमाशों को क्षेत्र में ब्राउन शुगर के कारोबार से जुड़ा बताया जा रहा है। पुलिस ने इनके खिलाफ मामला दर्ज कर गिरफ्तारी के लिए छापेमारी शुरू कर दी है। इधर, स्थानीय लोगों के अनुसार, बस्ती में भुगली उर्फ रेहाना और शब्बो ब्राउन शुगर का स्टॉक अपने पास रखती और बेचती है। ब्राउन बेचने वाले को जो भी मना करता है, उसे गोली मारने तक की धमकी दी जाती है।
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ब्राउन शुगर नेटवर्क पर उठे सवाल, बेखौफ तस्करों पर कार्रवाई की मांग
गौरतलब है कि बर्मामाइंस और आसपास के इलाकों में ब्राउन शुगर के कारोबार की शिकायतें नयी नहीं हैं। समय-समय पर पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारियों के दावे करती रही है, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि नशे का नेटवर्क अब भी सक्रिय है और लगातार फैल रहा है। ऐसे में यह वारदात केवल एक फायरिंग की घटना भर नहीं रह जाती, बल्कि कानून-व्यवस्था, पुलिस की रणनीति और संगठित अपराध के बढ़ते प्रभाव पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। यदि जांच में यह सामने आता है कि हमला नशे के कारोबार के विरोध में आवाज उठाने को लेकर हुआ, तो इसका मतलब साफ है कि नशा तस्करों का नेटवर्क इतना बेखौफ हो चुका है कि वह सामाजिक स्तर पर उठने वाली आवाजों को भी हिंसा के जरिए दबाने की कोशिश कर रहा है। .jpeg)
जांच के बाद साफ होगी हमले की असली वजह
फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं से मामले की जांच कर रही है और हमलावरों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि यह हमला आपसी रंजिश का परिणाम था या वास्तव में नशे के कारोबार के खिलाफ उठी आवाज को दबाने की कोशिश। लेकिन इतना तय है कि इस घटना ने बर्मामाइंस में सक्रिय ब्राउन शुगर के नेटवर्क, पुलिस की रणनीति और नशे के खिलाफ आगे आने वाले युवाओं की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर बहस छेड़ दी है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर की जा रही है और जांच पूरी होने के बाद ही हमले की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी। बर्मामाइंस थाना पुलिस ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर साक्ष्य जुटाने का काम तेज कर दिया है। संदिग्ध ठिकानों पर लगातार छापेमारी की जा रही है। पुलिस का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है और जल्द ही गोलीबारी के पीछे की वास्तविक वजह का खुलासा करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।