जामताड़ा
जिले में सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने और यातायात नियमों को कड़ाई से लागू करने के लिए जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। समाहरणालय सभागार में उपायुक्त (DC) आलोक कुमार की अध्यक्षता में आयोजित जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में कई महत्वपूर्ण और कड़े निर्णय लिए गए। उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि सड़क सुरक्षा केवल फाइलों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसका जमीनी असर दिखना अनिवार्य है।
नाबालिग चालकों पर विशेष नजर
बैठक का सबसे प्रमुख मुद्दा स्कूली बच्चों द्वारा स्कूटी और बाइक का उपयोग रहा। उपायुक्त ने इस बढ़ती प्रवृत्ति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए शिक्षा विभाग और सड़क सुरक्षा टीम को कड़े निर्देश दिए। अब स्कूल स्तर पर ऐसे नाबालिग छात्रों को चिह्नित किया जाएगा जो वाहन चलाकर स्कूल आते हैं। प्रशासन ने निर्णय लिया है कि इन बच्चों के अभिभावकों को स्कूल बुलाकर उनकी विशेष काउंसलिंग की जाएगी। उन्हें न केवल कानूनी प्रावधानों और भारी जुर्माने की जानकारी दी जाएगी, बल्कि कम उम्र में वाहन चलाने से जुड़े जीवन के खतरों के प्रति भी जागरूक किया जाएगा।
अवैध 'बंपर' और अवरोधों पर नाराजगी
सड़कों पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी को लेकर उपायुक्त ने अधिकारियों को फटकार लगाई। उन्होंने ग्रामीण और मुख्य सड़कों पर अवैध रूप से बनाए गए गति अवरोधकों (बंपर) और बिजली के खंभों को गिराकर बनाए गए अवरोधों पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि ये अवैध बंपर सुरक्षा के बजाय दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं। DC ने इन्हें तत्काल हटाने का आदेश देते हुए कहा कि जहां जरूरत हो, वहां वैज्ञानिक तरीके से सर्वे कर नियमानुसार बंपर बनाए जाएं।
प्रवर्तन और भारी जुर्माना
प्रशासन द्वारा की गई हालिया कार्रवाई के आंकड़े साझा करते हुए बताया गया कि अब तक 844 वाहनों की जांच की गई है, जिसमें यातायात नियमों के उल्लंघन पर 236 वाहनों से 8,61,150 रुपये का ऑनलाइन चालान वसूला गया। इसके अलावा, रिहायशी इलाकों और गलियों में तेज रफ्तार से चलने वाले 14 पिकअप और व्यावसायिक वाहनों पर भी 98,600 रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
भविष्य की कार्ययोजना और निर्देश
उपायुक्त ने सड़क सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जोर देते हुए कहा कि जिले के सभी पेट्रोल पंपों पर ‘नो हेलमेट-नो पेट्रोल’ नियम का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही iRAD पोर्टल के आंकड़ों के आधार पर दुर्घटना संभावित ब्लैक स्पॉट क्षेत्रों की पहचान कर वहां आवश्यक सुधारात्मक कार्य किए जाएं। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि सड़क दुर्घटनाओं में घायलों की सहायता करने वाले ‘गुड सेमेरिटन’ यानी नेक मददगारों को प्रोत्साहित एवं सम्मानित किया जाए, ताकि अधिक से अधिक लोग मानवता के इस कार्य में आगे आएं। गांधी चौक और चंचला मंदिर जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों में यातायात में बाधा बन रहे पेड़ों और अन्य अवरोधों को रात के समय हटाने का निर्देश दिया गया ताकि आवागमन सुचारू रहे। बैठक में सिविल सर्जन, कार्यपालक पदाधिकारी, परिवहन विभाग के अधिकारी और विभिन्न विभागों के अभियंता उपस्थित थे। प्रशासन के इस रुख से स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में जामताड़ा की सड़कों पर नियम तोड़ने वालों के खिलाफ अभियान और तेज होगा।