द फॉलोअप डेस्क
राज्य में शराब घोटाला मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) को जांच में बड़ी सफलता हाथ लगी है। एसीबी के मुताबिक, फर्जी बैंक गारंटी के आधार पर हुए घोटाले में विनय सिंह ने 70 लाख रुपये की वसूली की थी। यह रकम तत्कालीन उत्पाद सचिव विनय कुमार चौबे के कहने पर दी गई थी। दरअसल, यह खुलासा आरोपी महेश शेगड़े के बयान से हुआ है, जिसे एसीबी ने औपचारिक रूप से दर्ज किया है। बकायदा, अधिकारियों द्वारा इसकी पुष्टि भी की गई है। एसीबी अधिकारियों के अनुसार, नेक्सजेन सॉल्यूशन टेक्नोलॉजी से जुड़े खातों की भी जांच की जा रही है।

इस सिलसिले में कंपनी के अकाउंट से जुड़े राजीव कुमार झा का बयान दर्ज कराया गया है। उनके बयान के आधार पर एसीबी को यह जानकारी मिली है कि विनय चौबे की पत्नी स्वपना संचिता न तो किसी बैठक में शामिल होती थीं और न ही कंपनी के कार्यालय का कभी दौरा करती थीं। वहीं, पहले की गई जांच में एसीबी को पता चला था कि स्वप्ना संचिता नेक्सजेन सॉल्यूशन टेक्नोलॉजी में कंसल्टेंट के रूप में कार्यरत थीं। इसके एवज में उन्हें हर महीने 1.50 लाख रुपये का भुगतान किया जाता था। यह भुगतान वर्ष 2019 से 2023 तक किया गया। हालांकि, जांच के दौरान एसीबी के समक्ष न तो कोई नियुक्ति पत्र प्रस्तुत किया गया और न ही नियुक्ति के लिए किसी विज्ञापन से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराए गए।
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एसीबी अधिकारियों का कहना है कि बयान में सामने आए तथ्यों के आधार पर अब मनी ट्रेल हासिल करने की कोशिश तेज कर दी गई है। यह पता लगाया जा रहा है कि भुगतान किन खातों से हुआ, किन माध्यमों से रकम ट्रांसफर की गई और क्या यह राशि किसी अन्य उद्देश्य के लिए इस्तेमाल की गई। सूत्रों के अनुसार, शराब घोटाला केस में ऐसा अंदेशा लगाया जा रहा है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी और भी नाम सामने निकलकर सामने आएंगे। वहीं एसीबी के द्वारा इस पूरे नेटवर्क की परत-दर-परत जांच की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि फर्जी बैंक गारंटी के जरिए किस तरह से सरकारी सिस्टम का दुरुपयोग किया गया और कौन-कौन लोग इसमें शामिल हैं।