द फॉलोअप डेस्क
झारखंड में स्मार्ट सिटी बन रहा है लेकिन झारखंड का पुलिस प्रशासन अब भी स्मार्ट नहीं बन पा रहा है। ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि झारखंड पुलिस टोना- टोटका और अंधविश्वास मान रहे हैं। इतना ही नहीं सख्ती से इसका पालन भी कर रहे हैं। हालांकि पुलिस कर्मियों ने इसपर कुछ भी कहने से इंकार कर दिया लेकिन उन्होंने इस अंधविश्वास वाली बात को मना है। अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर हम किस टोना- टोटका और अंधविश्वास की बात कर रहे हैं। इस खबर में हम इसपर विस्तार से बात करेंगे।

देखिए क्या टोना-टोटका और अंधविश्वास मानते हैं पुलिसवाले
टोटका नंबर एक- पुलिस वाले स्टेशन डायरी और एफआईआर कॉपी को आपस में नहीं सटने देते हैं। ऐसे इसलिए क्योंकि उनका मानना है कि अगर दोनों सट गया तो थाना क्षेत्र में अपराध की घटना अचानक बढ़ जाती है। इतना ही नहीं अगर दोनों आपस में सट गया तो थाना प्रभारी की परेशानी बढ़ जाती है।
टोटका नंबर-2 थानेदार की कुर्सी को हिलाना डुलाना सख्त मना होगा। उनका मानना है कि अगर ऐसा हुआ तो थानेदार के निजी जिंदगी में उथल-पुथल हो जाएगी। उनकी थानेदारी भी जा सकती है।
टोटका नंबर-3 लेकिन जो तीसरा नंबर का टोना- टोटका है. थाना में किसी भी पुलिस के हाथ से डंडा और कलम नहीं गिरना चाहिए। अगर गिर गया तब तो पुलिस के हिसाब से उस इलाका में कोई बड़ा घटना या दुर्घटना हो सकता है। इसलिए ये दोनो हाथ से गिरना नहीं चाहिए।
टोटका नंबर-4 हाजत में चप्पल और जूता उतार के जाना है। ऐसा इसलिए क्योंकि थाना का सब कर्मचारी लोग हाजत को शुभ मानता है। इसलिए कोई आरोपी भी वहां चप्पल बाहर उतार अंदर जाता है।
टोटका नंबर-5 साल के पहले दिन संगीन धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज करना खुद के लिए थानेदार अशुभ मानते है।इसका कारण यह है कि साल के पहले दिन अपराध ही गंभीर धाराओं के तहत दर्ज करना पड़ रहा है, तो अब थानेदारी खतरे में पड़ सकती है।