द फॉलोअप डेस्क
JPSC 14वीं परीक्षा में अनियमितता के लिए एक विशेष सॉफ्टवेयर तैयार किए जाने का मामला सामने आया है। सीआईडी की एसआईटी की पूछताछ में टीडीपीएल के लिए काम करने वाले हेमंत वर्मा ने कथित तौर पर बताया है कि पूरी साजिश यूपी में विधान परिषद की परीक्षा में हुई अनियमितता की तर्ज पर रची गई थी। हेमंत वर्मा पिकर टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के निदेशक हैं। इसी कंपनी ने यूपी विधान परिषद आरओ/एआरओ परीक्षा के लिए पोर्टल और सॉफ्टवेयर तैयार किया था। हेमंत वर्मा ने पूछताछ में स्वीकार किया कि वर्ष 2020 में टीडीपीएल कंपनी के कहने पर उनकी कंपनी पिकर टेक्नोलॉजी ने यूपी विधान परिषद आरओ/एआरओ परीक्षा के लिए पोर्टल और सॉफ्टवेयर तैयार किया था। इसके बाद वर्ष 2025 में टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह और सतपाल सिंह को जेपीएससी परीक्षा संचालन का काम मिलने के बाद उन्होंने लखनऊ में हेमंत वर्मा से संपर्क किया। मो. उस्मान भी पिकर के लिए ही काम करता था। लखनऊ स्थित कार्यालय में हुई बैठक के दौरान टीडीपीएल की ओर से जेपीएससी परीक्षाओं के लिए भी वैसा ही सॉफ्टवेयर विकसित करने को कहा गया, जैसा यूपी विधान परिषद परीक्षा के लिए तैयार किया गया था।

तीन लाख रुपये वेतन और 20 फीसदी कमीशन का लालच
सीआईडी की पूछताछ में सामने आई जानकारी के अनुसार, इस काम के बदले टीडीपीएल ने पिकर के कर्मचारियों का पूरा खर्च उठाने के साथ-साथ तीन लाख रुपये प्रतिमाह वेतन देने और इससे होने वाली कमाई में से 20 प्रतिशत कमीशन देने का लालच दिया था। तैयार किए गए सॉफ्टवेयर के जरिए ओटीआर, पोस्ट एप्लीकेशन और एडमिट कार्ड जेनरेट किए जाते थे। आरोप है कि परीक्षा के बाद ओएमआर शीट और उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग के दौरान सेटिंग वाले अभ्यर्थियों के बारकोड निकालकर पीडीएफ एडिटर और बैकएंड सर्वर के माध्यम से अंकों में हेरफेर की जाती थी। सीआईडी की जांच में अब तक मिले तथ्यों के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया का कथित तौर पर दुरुपयोग कर JPSC 14वीं की पीटी में 100 से अधिक अभ्यर्थियों को अनुचित तरीके से पास कराया गया। इसके अलावा लिखित परीक्षा में भी बड़े पैमाने पर अंकों में हेरफेर किए जाने की योजना थी।

FRO और ACF में भी अंक बदलने का आरोप
सीआईडी जांच में सामने आए तथ्यों के मुताबिक, 14वीं JPSC PT में 100 से ज्यादा अभ्यर्थियों के अंकों में कथित तौर पर हेरफेर किया गया। वहीं FRO यानी फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर परीक्षा में 20 से 25 अभ्यर्थियों और ACF मेंस में 10 से 15 परीक्षार्थियों के अंकों में हेरफेर किए जाने की बात सामने आई है। इसके अलावा 14वीं JPSC कंबाइंड, बैकलॉग, ड्रग इंस्पेक्टर और APP समेत कई अन्य परीक्षाओं के एडमिट कार्ड और OTR जेनरेशन का काम भी इसी कथित साठगांठ के तहत कराए जाने की जानकारी जांच में मिली है। सीआईडी की एसआईटी अब इस पूरे मामले के अन्य तारों को जोड़ने में जुटी है।