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इंतजार खत्म : JPSC ने 17 साल बाद जारी किया डिप्टी कलेक्टर नियुक्ति परीक्षा परिणाम, 50 का हुआ चयन

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रांची:
झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन (JPSC) की नियुक्ति परीक्षाओं की कहानी किसी से छुपी नहीं है।  शुरू से ही यह परीक्षा सुर्खियों में रही है। किसी परीक्षा की तिथि जल्दी नहीं आती तो किसी का परिणाम। ऐसी ही कहानी है फर्स्ट डिप्टी कलेक्टर परीक्षा की। आप शायद भुल गए होंगे कि आपने कोई परीक्षा दी थी। लेकिन 17 साल बाद भी आयोग नहीं भूली। जेपीएससी द्वारा फर्स्ट डिप्टी कलेक्टर (First Deputy Collector) की नियुक्ति जो साल 2005 में आरंभ हुई थी।आखिरकार आयोग ने उसकी नियुक्ति प्रक्रिया पूरी कर दी है। 17 साल बाद आयोग ने इस परीक्षा का रिजल्ट जारी कर दिया है। जिसमें 50 अभ्यर्थियों का अंतिम रूप से चयन किया गया है। 


राजेश कुमार ने किया टॉप
आयोग द्वारा जारी परिणाम में राजेश कुमार ने टॉप किया है। दूसरे एवं तीसरे स्थान पर मनोज कुमार गोप और मुकेश कुमार हैं। हालांकि आयोग ने टॉपरों की घोषणा नहीं की है। अनारक्षित श्रेणी में 24, एससी श्रेणी में पांच, एसटी श्रेणी में 13, बीसी वन श्रेणी में चार तथा बीसी टू श्रेणी में तीन अभ्यर्थियों का चयन हुआ है। एक अभ्यर्थी का चयन अनारक्षित और दिव्यांग श्रेणी में हुआ है।

2005  में निकाला गया था विज्ञापन
इस परीक्षा की कहानी काफी दिलचस्प रही है 17 साल पहले यानी 2005  से इसकी कहानी शुरू होती है। जब जेपीएससी ने फर्स्ट डिप्टी कलेक्टर समिति के 50 पदों के लिए विज्ञापन निकाला था। ऐसे में सरकारी कार्यालयों में काम करने वाले कर्मचारी शिक्षक आवेदन दिया था। 8 हजार  से भी ज्यादा सरकारी कर्मियों ने आवेदन किया। 23 अप्रैल 2006 को रांची के 14 केंद्रों पर परीक्षा आयोजित हुई। लेकिन जैसे कि जेपीएससी के हर परीक्षा की कहानी है उस परीक्षा में भी बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आई थी। परीक्षाओं की ने अनियमितता की शिकायतें इसके बाद इसे रद्द कर दिया गया। बाद में राज्य सरकार ने यह परीक्षा नए सिरे से आयोजित करने का निर्णय लिया। जिसके आलोक में जेपीएससी ने 19 अक्टूबर 2015 को फिर से परीक्षा लेने की सूचना जारी की। 


90 प्रतिशत उम्मीदवार रिटायरमेंट की दहलीज पर
2015 में जारी हुई सूचना के बाद 3 जनवरी 2020 को यह परीक्षा आयोजित हो पाई। जिसमें लगभग 4 हजार शामिल हुए थे। परीक्षा आयोजित होने के बाद इसके परिणाम जारी होने में भी लगभग तीन साल लग गए। इसमें में एक काफी जरूरी बात है जो आप लोगों को मालूम होना चाहिए। वो यह है कि चयनित 90 प्रतिशत उम्मीदवार रिटायरमेंट की दहलीज पर पहुंच चुके हैं। वहीं अधिकांश अपराध अभ्यार्थी 34 साली सेवा दे पाएंगे।


हाईकोर्ट से लेकर राजभवन तक की सैर कर चुका है मामला
इस परीक्षा की कहानी जेपीएससी से लेकर निगरानी ब्यूरो और हाईकोर्ट से लेकर राजभवन तक की सैर कर चुकी है। वहीं झारखंड विधानसभा में भी इसे लेकर कई बार विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधा है। झारखंड मुक्ति मोर्चा के विधायक दीपक बेरवा ने सदन में यह मामला उठाया था। तब मंत्री आलमगीर आलम ने इसपर जवाब दिया था कि 60 दिनों के अंदर रिजल्ट प्रकाशित हो जाएगा। यह डेडलाइन कब की गुजर गई लेकिन रिजल्ट नहीं आया।