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गिरिडीह के जंगलों में मिला लिथियम! GSI टीम ने किया सर्वे, लोगों में उम्मीद, उत्सुकता और चिंता भी

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द फॉलोअप डेस्क
गिरिडीह जिले के तिसरी प्रखंड के घने जंगलों से आई एक खबर पूरे इलाके में चर्चा, उत्सुकता और सवालों का कारण बन गई है. वह खबर है लिथियम भंडार मिलने की संभावना. वही खनिज जो आज इलेक्ट्रिक वाहनों, मोबाइल बैटरियों, ऊर्जा भंडारण प्रणालियों और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र की धड़कन है. हाल ही में जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की टीम ने असुर हड्डी और डूबा के सघन जंगलों में आधुनिक तकनीकों के जरिए विस्तृत भू-वैज्ञानिक सर्वे किया. टीम ने कई जगह गहराई तक ड्रिलिंग कर नमूने एकत्र किए, जिन्हें आगे की जांच के लिए प्रयोगशालाओं में भेजा गया है. ड्रिलिंग पॉइंट्स को सावधानीपूर्वक मार्क किया और सील कर दिया गया है. स्थानीय लोगों में अब यह धारणा मजबूत हो रही है कि क्षेत्र में लिथियम जैसे बहुमूल्य खनिज की मौजूदगी हो सकती है. हालांकि विभाग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि या रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है, इसलिए सटीक स्थिति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है.
दूसरी ओर, संभावित खनन गतिविधियों को लेकर स्थानीय लोगों ने अपनी मांगें जोरशोर से उठानी शुरू कर दी हैं. उनका कहना है कि अगर सरकार खनन कार्य शुरू करती है, तो सबसे पहले प्रभावित लोगों के अधिकार और हितों की सुरक्षा सुनिश्चित हो. ग्रामीणों की मांग है कि भूमि अधिग्रहण की स्थिति में उचित मुआवजा दिया जाए. पारदर्शी पुनर्वास नीति लागू हो और विस्थापित परिवारों के लिए स्थायी आवास की व्यवस्था की जाए. इसके अलावा स्थानीय युवाओं को खनन परियोजना में प्राथमिकता के आधार पर रोजगार दिया जाए, साथ ही क्षेत्र में बेहतर सड़क, बिजली, पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का विकास किया जाए. साथ ही, उन्होंने स्पष्ट किया कि जंगल उनके जीवन और आजीविका का प्रमुख आधार है, इसलिए पर्यावरण संरक्षण और वन अधिकारों की अनदेखी किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं होगी. उन्होंने मांग की है कि किसी भी निर्णय से पहले विस्तृत पर्यावरणीय प्रभाव आकलन कराया जाए और स्थानीय लोगों की सहमति ली जाए. 
इसे लेकर जिले के डीसी रामनिवास यादव ने कहा कि GSI की टीम ने फिलहाल जांच की है कि कहां कितना लिथियम मिलने की संभावना है. टीम ने ड्रिलिंग करके कुछ सैंपल निकाला है और उन्होंने देखा है कि यहां संदिग्ध मात्रा में लिथियम मिला है. और यह तैयारी है कि कैसे उसे प्रीक्योर किया जा सके. फिलहाल पूरे मामले में GSI की आधिकारिक रिपोर्ट और राज्य सरकार की नीति का इंतजार है. रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि क्षेत्र में वास्तव में लिथियम का कितना भंडार है और भविष्य में यहां खनन कार्य शुरू होगा या नहीं. तब तक यह मुद्दा इलाके में उम्मीदों, उत्सुकता और चिंताओं का केंद्र बना हुआ है. 

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