रांची
सर्दी की दस्तक के साथ ही शहरी पिछड़े इलाकों के जरूरतमंद बच्चों की मुस्कान बिखेरने वाली एक नेक पहल राँची के ईस्लामनगर,पथलकुदवा में देखने को मिली। मौलाना आजाद ह्यूमेन इनिशिएटिव (माही) की 'कोल्ड इज बोल्ड-एन इनिशिएटिव बाय माही' मुहिम ने रेड क्रेसेंट पब्लिक स्कूल के 35 छात्र-छात्राओं को उपहार स्वरूप गर्म स्वेटर भेंट कर उनकी शीतलहरी की परेशानी को कम किया। यह आयोजन न केवल शारीरिक सुरक्षा का प्रतीक बना, बल्कि शिक्षा के द्वार पर खड़े इन नन्हों के भविष्य को मजबूत करने वाली कड़ी भी साबित हुआ।

शहरी पिछड़े इलाकों में ठंड के मौसम में यूनिफॉर्म और स्वेटर के अभाव से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो जाती है। माही ने इस चुनौती को स्वीकार करते हुए स्कूल में आयोजित समारोह में छात्र-छात्राओं को सम्मानपूर्वक स्वेटर वितरित किए। कार्यक्रम में माही के कन्वेनर व झारखंड सुन्नी वक्फ बोर्ड के सदस्य इबरार अहमद ने मुख्य भूमिका निभाई, जबकि फूल बागान पंचायत के सदर बदरू मल्लिक की उपस्थिति ने स्थानीय सहयोग को नई ताकत दी। स्कूल के प्रधानाध्यापक इम्तियाज अहमद, उप-प्रधानाध्यापिका मोसर्रत जहां, शिक्षिकाओं संगीता एक्का टोपनो, निकहत अंजुम, आभा रानी हेंब्रम, सिरीला डुंगडुंग, कांति खलको, गुलफशां फिरदौस, सानिया फरहा, आफरीन सबा, चांदनी तबस्सुम व नेहा रानी ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। माही के उपाध्यक्ष खालिद सैफुल्लाह व मोहम्मद नजीब की मौजूदगी ने आयोजन को और समृद्ध किया।
इस पहल से न केवल ड्रॉपआउट की आशंका कम होगी, बल्कि शहरी पिछड़े इलाकों में शिक्षा के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी। माही का यह प्रयास मौलाना आजाद के आदर्शों को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो सामाजिक समानता को मजबूत करने पर केंद्रित है।

'शिक्षा ही सच्ची गर्माहट, ठंड को हरा दें बच्चे'
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए माही के कन्वेनर इबरार अहमद ने कहा, "ये स्वेटर सिर्फ ऊन के धागों से नहीं बने, बल्कि समाज की एकजुटता के धागों से बुने गए हैं। ठंड की कड़ाके में भी इन बच्चों की आंखों में चमक देखकर लगता है कि ज्ञान की लौ कभी बुझने नहीं देगी। हमारा संकल्प है कि हर स्कूल, हर शहरी पिछड़ा इलाका तक ऐसी मुहिम पहुंचे, ताकि कोई बच्चा सर्द हवाओं से डरे नहीं, बल्कि सपनों की उड़ान भरे। आइए, हम सब मिलकर इस जंग को शिक्षा के माध्यम से जीतें।
फूल बागान पंचायत के सदर बदरू मल्लिक ने अपने संक्षिप्त संबोधन में भावुक होकर कहा, "शहरी पिछड़े इलाकों में शिक्षा की जड़ें मजबूत करने के लिए ऐसी पहलें अमृत तुल्य हैं। ये 35 बच्चे हमारे इलाके का भविष्य हैं; इन्हें स्वेटर देकर हमने ठंड को तो हराया, लेकिन असल जीत तब होगी जब हर घर से स्कूल की घंटी गूंजे। पंचायत स्तर पर हम पूर्ण सहयोग देंगे—चाहे संसाधन हों या जागरूकता। समाज के हर तबके को आगे आना होगा, ताकि ये नन्हे फूल खिल सकें और देश को महकाएं।"
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