द फॉलोअप डेस्क
पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने आज राज्य में सरकारी स्तर पर धान खरीदी में हो रहे बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन देश विदेश का दौरा करते हैं और बोलते हैं कि उनकी सरकार गांव से चलती है। लेकिन सच्चाई क्या है, राज्य के लाखों किसानों से पूछा जा सकता है। गांव के रीढ़ कहे जानेवाले किसान लाचार और परेशान हैं। हेमंत सरकार ने विधानसभा चुनाव में 3200 रूपये एमएसपी पर धान खरीद का वादा किया। लेकिन बाद में 2400 रुपए की घोषणा कर दी जिसमें 2300 रुपया तो केंद्र सरकार से ही अनुदान मिलता है। राज्य सरकार की भागीदारी केवल 100 रुपए है। इसके बाद भी किसानों से धान क्रय में बिचौलिए और दलाल हावी हैं। इस वर्ष 60लाख क्विंटल धान खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया है। लेकिन दो महीना से ज्यादा बीत जाने के बाद भी अब तक 19 लाख 80 हजार 216 क्विंटल धान ही किसानों से खरीदे गए है। राज्य में 2 लाख 79 हजार किसान पंजीकृत हैं लेकिन मात्र 35547 किसानों से ही धान खरीदे गए हैं।
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बाबूलाल मरांडी ने कहा कि राज्य सरकार बिचौलियों और दलालों को धान बेचने के लिए किसानों को मजबूर कर रही है। किसान 1500 रूपये क्विंटल धान बेचेंगे और सरकार बिचौलियों से धान खरीद कर लक्ष्य पूरा करने का दिखावा करेगी। इसके कारण निर्धारित दर का लाभ बिचौलियों के खाते में जाएगा जिससे सरकार में बैठे लोगों की भी तिजोरी भरी जाएगी। उन्होंने कहा कि गुमला जिला में इस तरह के मामले से उन्होंने मुख्यमंत्री को भी अवगत कराया। सदन में भी मामला उठाया। बताया कि कैसे फर्जी किसान बनाए जा रहे हैं। लेकिन सरकार कार्रवाई की जगह मौन साधे बैठी है। प्रेसवार्ता में प्रदेश मंत्री सरोज सिंह और मीडिया प्रभारी शिव पूजन पाठक भी उपस्थित थे।
