नंदलाल तुरी
पाकुड़ के पुराना डीसी मोड़ से लेकर शहरकोल नया डीसी मोड़ तक सड़क सुबह होते ही मानो अघोषित पार्किंग ज़ोन में बदल जाती है। नो-एंट्री का बोर्ड सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गया है, क्योंकि भारी वाहन बेखौफ सड़क किनारे खड़े रहते हैं। सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि बस्ती की ओर जाने वाली संकरी गलियाँ भी इन वाहनों के कारण जाम हो जाती हैं। इससे मोहल्ले के लोगों को रोज़मर्रा की परेशानी झेलनी पड़ती है और स्कूली बच्चों को बेहद सावधानी के साथ सड़क पार करनी पड़ती है।
परिवहन विभाग के पदाधिकारियों का कहना है कि बड़ी गाड़ियों को सिर्फ शहरकोल के अंतिम छोर जहां बोरिंग मशीन खड़ी रहती है वहीं तक रुकने की अनुमति है। महेशपुर की ओर जाने वाली सड़क पर भी भारी वाहन सिर्फ समाहरणालय मोड़ के आगे तक ही खड़े हो सकते हैं। आदेश कागज़ों पर दर्ज हैं और बोर्ड लगे हैं, लेकिन सड़क पर इनका पालन नहीं दिखता।
सबसे बड़ा सवाल उठता है नियंत्रण कौन करे? पदाधिकारी बताते हैं कि इसकी जिम्मेदारी जिला मुख्यालय डीएसपी की है, लेकिन वर्षों से यह समस्या जस की तस बनी हुई है। नियम टूट रहे हैं, सड़कें घिर रही हैं और प्रशासन खामोश है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सुबह स्कूली बच्चों को निकालना सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है। भारी वाहनों के बीच से निकलना रोज़मर्रा का जोखिम बन चुका है। महिलाएँ और बुजुर्ग भी कई बार घरों से निकलने में असहज महसूस करते हैं। लोगों का सवाल है क्या नो-एंट्री सिर्फ कागज़ों में लागू है? और प्रशासन कब कार्रवाई करेगा?
