रांची
झारखंड विधानसभा में धान खरीद की धीमी रफ्तार को लेकर गुरुवार को जोरदार बहस हुई। विपक्ष ने सरकार को घेरते हुए लक्ष्य, खरीद की समयसीमा और कटौती के मुद्दे पर कई सवाल उठाए।
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि मार्च तक धान खरीद का लक्ष्य रखना बिचौलियों को फायदा पहुंचाने जैसा है। उन्होंने कहा कि बिहार सीमा से लगे इलाकों में धान की खरीद ज्यादा हो रही है। सरकार को जनवरी तक ही धान खरीद का लक्ष्य पूरा करने की तैयारी करनी चाहिए थी।
विधायक अरूप चटर्जी ने भी सदन में यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि सरकार ने 6 लाख मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य तय किया है, लेकिन अब तक करीब 3 लाख मीट्रिक टन ही खरीद हो पाई है। उन्होंने यह भी कहा कि कई प्रखंडों में पैक्स सही ढंग से काम नहीं कर रहे हैं, ऐसे में लक्ष्य पूरा होना मुश्किल लग रहा है।

इस पर जवाब देते हुए मंत्री इरफान अंसारी ने कहा कि जरूरत पड़ने पर धान खरीद की अंतिम तिथि 31 मार्च से आगे भी बढ़ाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पहली बार किसानों को धान खरीद का वन टाइम भुगतान कर रही है। मैनपावर की कमी और गोदामों के अलग-अलग स्थानों पर होने के कारण खरीद की गति कुछ धीमी हुई है।
वहीं कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि राज्य में कुल 4408 पैक्स और लैंप्स हैं, लेकिन फिलहाल धान खरीद के लिए लगभग 700 से 800 पैक्स का ही उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि विभाग बेहतर मैपिंग करे तो इस संख्या को और बढ़ाया जा सकता है।
इस दौरान विधायक हेमलाल मुर्मू ने भी धान खरीद में प्रति क्विंटल 10 किलो कटौती का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि यह किसानों के साथ अन्याय है और सरकार को इस मामले में स्पष्ट नीति बनानी चाहिए।
