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गुमला में भूमि अधिग्रहण के विरोध में आंदोलन, देवेंद्रनाथ महतो के नेतृत्व में ग्रामसभा की सहमति के बिना सड़क निर्माण का विरोध

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गुमला
झारखंड में जमीन अधिग्रहण से जुड़ा विवाद लगातार गहराता जा रहा है। भारत माला परियोजना के तहत गुमला एनएच-43 डायवर्जन और चौड़ीकरण के विरोध में आदिवासी बहुल क्षेत्र गुमला में आंदोलन तेज हो गया है। इस जन आंदोलन का नेतृत्व झारखंड लोककल्याण मोर्चा (जेएलकेएम) के केंद्रीय उपाध्यक्ष देवेंद्रनाथ महतो ने किया।
आंदोलन की शुरुआत गुमला हड़ताली वृक्ष परिसर से पदयात्रा के रूप में हुई, जो उपायुक्त कार्यालय गुमला तक पहुंचकर धरने में तब्दील हो गई। इस दौरान आंदोलनकारियों ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। प्रदर्शन स्थल पर भारी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए, जो अपनी जमीन के जबरन अधिग्रहण से आक्रोशित नजर आए।


देवेंद्रनाथ महतो ने कहा कि गुमला से घाघरा तक भारत माला सड़क परियोजना का कार्य ग्राम सभा की सहमति के बिना किया जा रहा है, जो पूरी तरह से असंवैधानिक और आदिवासी अधिकारों का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार के गजट संख्या 3821, दिनांक 25 अगस्त 2022 के अनुसार प्रस्तावित मार्ग खोरा गांव से होकर गुमला बायपास, करौंदी, जोराम, सिलम, अंबाटोली, खटखोर, भलमंडा, कुलमुंड, रायडीह, कुरूछत्तीरपुर होते हुए छत्तीसगढ़ सीमा तक जाना है। लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों और निर्माण कंपनी (शिवालय कंस्ट्रक्शन) की मिलीभगत से इस मार्ग को डायवर्ट कर दिया गया है।
इस डायवर्जन से करीब 19 मौजा के हजारों एकड़ बहुफसली उपजाऊ कृषि भूमि प्रभावित हो रही है। महतो ने आरोप लगाया कि बिना पारंपरिक ग्राम सभा की सहमति और भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 (संशोधित 2015) के प्रावधानों के उल्लंघन के साथ यह निर्माण कार्य चलाया जा रहा है, जो पूरी तरह से गलत है। आंदोलनकारियों की मांग है कि गजट संख्या 3821 के अनुसार ही गुमला-घाघरा एनएच-43 का चौड़ीकरण किया जाए, अन्यथा आंदोलन और उग्र होगा। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि वे विकास के विरोध में नहीं हैं, लेकिन बिना कानूनी प्रक्रिया के उनकी उपजाऊ जमीन छीनना उन्हें स्वीकार नहीं है।


धरना स्थल पर अब तक किसी भी प्रशासनिक अधिकारी ने आंदोलनकारियों से वार्ता नहीं की है। आंदोलनकारी उपायुक्त कार्यालय के सभी द्वारों को बंद कर वहां डटे हुए हैं, और किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को कार्यालय से बाहर नहीं जाने दिया जा रहा है।
इस आंदोलन में देवेंद्र नाथ महतो के साथ-साथ कई प्रमुख नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे, जिनमें शनि संदीप तिग्गा (केंद्रीय युवा मोर्चा), पंचम एक्का (केंद्रीय महासचिव), सलीन्द्र उरांव (जिला सचिव, गुमला), अनूप फ्रांसिस कुजूर (प्रदेश सचिव), विनय कुमार (जिला महासचिव), राजेश कुमार साहू (मीडिया प्रभारी), भुनेश्वर गोप (जिला ओबीसी मोर्चा), कृष्ण चिक बाईक (लोहरदगा जिला उपाध्यक्ष), मनोज चिक बाईक (गुमला जिला उपाध्यक्ष), बप्पी उरांव, वीरेंद्र लोहारा, सिलास बड़ा, नंदलाल कुमार पाना, मरियम एक्का, सरिता उरांव, क्रांति उरांव, बिनसौ उरांव और बिंजू उरांव शामिल थे। इनके अलावा हजारों की संख्या में ग्रामीणों ने भी सक्रिय भागीदारी दी।


 

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