रांची
झारखंड विधानसभा अध्यक्ष रबींद्रनाथ महतो ने बारबाडोस में आयोजित राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (Commonwealth Parliamentary Association - CPA) के 68वें सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने “A look ahead to Commonwealth Heads of Government Meeting 2026: Championing the Human Factor from a Gender and Accessibility Lens” विषय पर अपने विचार रखे।
अध्यक्ष महतो ने कहा कि इस सम्मानित सभा को संबोधित करना उनके लिए गौरव की बात है। उन्होंने बताया कि यह विषय भारत के मूल विचार “वसुधैव कुटुम्बकम – विश्व एक परिवार है” से जुड़ा हुआ है। भारत के संविधान में सभी नागरिकों को समानता, स्वतंत्रता, न्याय और भाईचारे की गारंटी दी गई है, जो विकास के केंद्र में “मानव कारक” को रखता है।

उन्होंने कहा कि भारत, दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र होने के नाते, महिलाओं के सशक्तिकरण और दिव्यांगजनों के लिए समान अवसरों पर लगातार काम कर रहा है। राष्ट्रमंडल के 56 देश लोकतंत्र और मानवाधिकारों के साझा मूल्यों से जुड़े हैं, और चोगम 2026 (CHOGM 2026) की तैयारी में यह प्रतिबद्धता और मजबूत होनी चाहिए।
महतो ने ऋग्वेद का उदाहरण देते हुए कहा – “जहां स्त्रियों का सम्मान होता है, वहां देवता प्रसन्न होते हैं।” उन्होंने बताया कि झारखंड के आदिवासी समाज में यह परंपरा आज भी जीवंत है। यहां महिलाएं सामाजिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर बराबर की भागीदार हैं। वे कृषि, वन संरक्षण और निर्णय लेने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड सरकार महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए कई योजनाएं चला रही है। इनमें मुख्यमंत्री मायां समान योजना विशेष रूप से उल्लेखनीय है, जो महिलाओं को आर्थिक सहायता और आत्मनिर्भरता का अवसर देती है। इसके अलावा, लड़कियों की शिक्षा, मातृ स्वास्थ्य और महिला स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी योजनाओं ने ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में बड़ा बदलाव लाया है।

महतो ने कहा कि भारत सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के तहत लैंगिक समानता (SDG-5) और समान रोजगार (SDG-8) की दिशा में दृढ़ता से आगे बढ़ रहा है। भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी महिला सशक्तिकरण को लेकर लगातार सक्रिय है।
अपने भाषण के अंत में उन्होंने कहा कि ईशा उपनिषद का विचार हमें सिखाता है कि ब्रह्मांड की हर चीज दिव्य है और हर व्यक्ति सम्मान का हकदार है। यही “मानवीय कारक” का सार है—एक ऐसा समाज जो विविधता का सम्मान करे, महिलाओं को सशक्त बनाए और “एक विश्व, एक परिवार” के सिद्धांत पर चले। सम्मेलन के इस सत्र में सीपीए के महासचिव स्टीफन ट्वीघ, ऐंटिगुआ और बरमुडा के स्पीकर, ओडिशा और गोवा विधानसभा के अध्यक्ष सहित कई देशों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
