द फॉलोअप डेस्क
राजू कुमार सुमन ने झारखंड संयुक्त असैनिक सेवा परीक्षा (JPSC) 2023 में 286वीं रैंक प्राप्त कर डीएसपी पद पर चयनित होकर अपने गांव, परिवार और जिले का नाम रोशन किया है। एससी-एसटी वर्ग से आने वाले राजू चतरा जिले के सिमरिया प्रखंड के पचमो गांव के निवासी हैं। यह इलाका कभी नक्सल प्रभावित रहा करता था, लेकिन अब इस इलाके ने एक काबिल अफसर को देश को सौंपा है।
राजू की प्रारंभिक शिक्षा सैनिक स्कूल हजारीबाग से हुई। इंटर के बाद वह दिल्ली चले गए जहां उन्होंने फैशन डिजाइनिंग में ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने देश के अलग-अलग हिस्सों में फैशन इंडस्ट्री में काम किया और फिर वियतनाम में एक प्रतिष्ठित पद पर कार्य करते हुए हर महीने डेढ़ से दो लाख रुपये कमा रहे थे।
2020 में कोरोना महामारी के दौरान जब पूरी दुनिया थम गई, तब राजू भी वियतनाम से भारत लौटे। घर लौटने के बाद उन्होंने ठान लिया कि अब वह कुछ बड़ा और सार्थक करेंगे। यहीं से शुरू हुई उनकी सिविल सेवा की तैयारी। यूपीएससी की तैयारी के दौरान उन्होंने एक बार प्रीलिम्स निकाला और दूसरी बार CAPF परीक्षा में सफलता पाकर ITBP में असिस्टेंट कमांडेंट पद हासिल किया। हालांकि, उन्होंने उस जॉइनिंग को 6 माह के लिए स्थगित कर दिया। उसी दौरान JPSC परीक्षा में सफलता मिल गई और वह डीएसपी बन गए।
राजू कुमार सुमन के पिता बिरजू गंझू खुद झारखंड पुलिस में डीएसपी पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। बेटे के उसी पद पर चयन की खबर पाकर वे बेहद भावुक हो उठे। उन्होंने कहा “जिस पद से मेरी नौकरी समाप्त हुई, उसी पद से मेरे बेटे की शुरुआत हो रही है, यह मेरे लिए गर्व और भावुकता से भरा क्षण है।”
सुबह जब वे अपनी पत्नी के साथ झील किनारे टहल रहे थे, तभी उन्हें यह खबर मिली। वे कहते हैं..“मैं झील किनारे ही खुशी से उछल पड़ा था, यह खुशी शब्दों में बयान नहीं की जा सकती।” राजू का गांव पचमो अभी भी विकास की मुख्यधारा से कोसों दूर है। लेकिन इस गांव ने राजू जैसे प्रतिभाशाली युवा को जन्म दिया है जिसने यह साबित कर दिया कि कड़ी मेहनत, लगन और संकल्प के सामने कोई बाधा बड़ी नहीं होती।