रांची:
रांची की यातायात व्यवस्था में सुधार और शहर के सुनियोजित विकास के लिए तीन नए फ्लाईओवर बनाए जाएंगे। नगर विकास विभाग ने इसका प्रस्ताव तैयार कर लिया है। इस प्रस्ताव के अनुसार, बिरसा चौक से तुपुदाना चौक (टेंडर हार्ट स्कूल के निकट), कटहल मोड़ से दलादिली चौक तथा लालपुर-फिरायालाल-डंगराटोली इंटीग्रेटेड फ्लाईओवर का निर्माण किया जाएगा। प्रस्तावित तीनों फ्लाईओवर के निर्माण पर करीब 2,335.87 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। हालांकि, परियोजनाएं अभी प्रस्ताव के प्रारंभिक चरण में हैं और अंतिम मंजूरी, बजट आवंटन व निर्माण शुरू होने की समय-सीमा को लेकर आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।

सीएम हेमंत सोरेन की बैठक में पेश किया गया डिजाइन
जानकारी के अनुसार, बीते 3 सितंबर को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य में सुनियोजित शहरी विकास और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप शहरों के विस्तार को लेकर अधिकारियों के साथ व्यापक चर्चा की थी। इसी बैठक में नगर विकास विभाग की ओर से ‘ब्यूटीफिकेशन ऑफ द कैपिटल सिटी ऑफ रांची’ शीर्षक से तैयार रिपोर्ट और डिजाइन का प्रेजेंटेशन दिया गया। इस डिजाइन को जुडको (JUIDCO) की ओर से तैयार किया गया है। रिपोर्ट में राजधानी के यातायात और शहरी बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने से जुड़ी योजनाओं को शामिल किया गया है। प्रस्तावित फ्लाईओवर परियोजनाओं के क्रियान्वयन से पहले संबंधित विभागों की मंजूरी और अन्य औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी की जानी हैं।
बिरसा चौक से तुपुदाना चौक तक
इस मार्ग पर प्रस्तावित फ्लाईओवर का एक सिरा रिंग रोड के नजदीक तक पहुंचने की योजना है। इससे रिंग रोड की ओर जाने वाले वाहनों को शहर के व्यस्त हिस्सों से गुजरने में राहत मिल सकती है। इस कॉरिडोर के निर्माण से बिरसा चौक और तुपुदाना क्षेत्र के बीच यातायात संपर्क बेहतर करने का लक्ष्य है।
कटहल मोड़ से दलादिली चौक तक
कटहल मोड़ से दलादिली चौक तक प्रस्तावित फ्लाईओवर का एक सिरा रिंग रोड से जुड़ने की योजना के तहत रखा गया है। इससे शहर के अंदरूनी इलाकों और बाहरी क्षेत्रों के बीच यातायात आवागमन को सुगम बनाने में मदद मिल सकती है। इस मार्ग पर ट्रैफिक दबाव कम करना परियोजना के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है।
सर्किट हाउस से डंगराटोली और लालपुर से फिरायालाल चौक तक
प्रस्तावित तीसरी परियोजना के तहत सर्किट हाउस से डंगराटोली तथा लालपुर से फिरायालाल चौक तक के मार्ग को शामिल किया गया है। यह सड़क घनी आबादी वाले क्षेत्रों से होकर गुजरती है, जहां नियमित रूप से यातायात दबाव और जाम की समस्या सामने आती है। फ्लाईओवर बनने से मुख्य सड़क पर वाहनों के आवागमन को बेहतर तरीके से संचालित करने में मदद मिल सकती है।
कई अन्य फ्लाईओवर भी निर्माण प्रक्रिया में
रांची में यातायात व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई अन्य फ्लाईओवर परियोजनाओं पर भी काम चल रहा है। इनमें करमटोली-चिरौंदी, अरगोड़ा-चापूटोली और हरमू रोड फ्लाईओवर शामिल हैं। इन परियोजनाओं की टेंडर प्रक्रिया पूरी होने और निर्माण एजेंसियों के चयन की जानकारी सामने आई है। ऐसे में संबंधित औपचारिकताएं पूरी होने के बाद निर्माण शुरू होने की संभावना है। करमटोली-चिरौंदी कॉरिडोर: यह फ्लाईओवर करीब 3 किलोमीटर लंबा प्रस्तावित है। इसका मार्ग करमटोली चौक से साइंस सिटी होते हुए चिरौंदी तक जाने की योजना है। अरगोड़ा-चापूटोली कॉरिडोर: इस कॉरिडोर की लंबाई करीब 4 किलोमीटर बताई गई है। इसके जरिए हरमू रोड से डिबडीह ब्रिज तक सीधी कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। हरमू रोड फ्लाईओवर: प्रस्तावित फ्लाईओवर सहजानंद चौक के पास से जज कॉलोनी के समीप तक बनाया जाना है। इससे इस मार्ग पर यातायात व्यवस्था को बेहतर करने में मदद मिल सकती है।
घनी आबादी वाले इलाकों में कम हो सकता है ट्रैफिक दबाव
रांची के कई प्रमुख मार्ग घनी आबादी वाले इलाकों से होकर गुजरते हैं। इन सड़कों पर रोजाना बड़ी संख्या में निजी वाहन, सार्वजनिक परिवहन और अन्य वाहनों की आवाजाही होती है। व्यस्त समय के दौरान यातायात दबाव बढ़ने से जाम की स्थिति बनती है। प्रस्तावित फ्लाईओवर परियोजनाओं का उद्देश्य मुख्य मार्गों पर वाहनों की आवाजाही को सुगम बनाना और ट्रैफिक दबाव को कम करना है। हालांकि, जाम की समस्या पर वास्तविक प्रभाव फ्लाईओवर के डिजाइन, कनेक्टिविटी, निर्माण गुणवत्ता और यातायात प्रबंधन व्यवस्था पर निर्भर करेगा।
रिंग रोड से कनेक्टिविटी बेहतर करने पर जोर
प्रस्तावित परियोजनाओं में रिंग रोड से जुड़ाव को भी महत्व दिया गया है। बिरसा चौक-तुपुदाना चौक और कटहल मोड़-दलादिली चौक मार्गों के रिंग रोड के नजदीक पहुंचने से शहर के भीतरी हिस्सों से बाहरी मार्गों की ओर जाने वाले वाहनों को वैकल्पिक संपर्क मिल सकता है। इससे शहर के प्रमुख मार्गों पर वाहनों का दबाव कम करने और यातायात प्रवाह को बेहतर बनाने में सहायता मिलने की उम्मीद है। हालांकि, परियोजनाओं के अंतिम स्वरूप और कनेक्टिविटी से जुड़े विस्तृत तकनीकी प्रावधानों की पुष्टि आधिकारिक स्वीकृति और विस्तृत परियोजना दस्तावेज जारी होने के बाद ही हो सकेगी।
परियोजना की मंजूरी और निर्माण की समय-सीमा का इंतजार
तीनों फ्लाईओवर परियोजनाओं पर 2,335.87 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। फिलहाल यह योजना प्रस्ताव के शुरुआती चरण में है। अंतिम प्रशासनिक मंजूरी, बजट आवंटन, विस्तृत तकनीकी स्वीकृति और निर्माण शुरू होने की समय-सीमा को लेकर औपचारिक घोषणा होना बाकी है। इन प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ही परियोजनाओं की वास्तविक प्रगति और निर्माण कार्य की समय-सारिणी स्पष्ट हो सकेगी।