रांची
झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार और जेएलकेएम केंद्रीय वरीय उपाध्यक्ष देवेंद्रनाथ महतो ने बुधवार को रांची विश्वविद्यालय के खोरठा क्षेत्रीय एवं जनजातीय भाषा विभागाध्यक्ष, प्रख्यात शिक्षाविद् डॉ. कुमारी शशि की कृति “दुखिया” खोरठा उपन्यास का विमोचन किया। इस उपन्यास में झारखंड की महिलाओं की समस्याओं और उनके जीवन संघर्ष का गहन व सजीव चित्रण किया गया है। कार्यक्रम के दौरान झारखंड के चर्चित लेखक देवकुमार द्वारा लिखित “मैं हूं झारखंड” और “बिरहोर हिंदी-अंग्रेजी शब्दकोश” भी राज्यपाल को भेंट की गई।

राज्यपाल संतोष गंगवार ने “दुखिया” की सराहना करते हुए कहा कि यह रचना समाज में महिलाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर जागरूकता बढ़ाने का महत्वपूर्ण कार्य करेगी। वहीं, देवेंद्रनाथ महतो ने प्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि साहित्य समाज का दर्पण है और महिलाओं को साहित्य से जुड़ने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आज भी 21वीं सदी में महिलाएं उपेक्षा और प्रताड़ना का शिकार होती हैं, लेकिन ऐसे उपन्यास उन्हें संघर्ष और परिवर्तन की प्रेरणा देंगे।
उपन्यास की लेखिका डॉ. कुमारी शशि ने कहा कि “दुखिया” हर महिला को पढ़नी चाहिए क्योंकि इसमें उनके संघर्षों और सामाजिक उपेक्षा का यथार्थ चित्रण है।
उन्होंने बताया कि उपन्यास की नायिका गांव की ऐसी महिला है, जिसके जीवन में सुख कभी आया ही नहीं—घर होते हुए भी बेघर, माता-पिता के रहते भी अनाथ और समाज से बहिष्कृत। फिर भी वह संघर्ष करती है और अपने सपनों को पूरा करने का साहस दिखाती है। उन्होंने सवाल उठाया, “आखिर महिलाओं का दोष क्या है कि समाज एक आंख में काजल तो दूसरी में धूल लगाता है?”
इस मौके पर जेएलकेएम केंद्रीय वरीय उपाध्यक्ष देवेंद्रनाथ महतो, लेखक अनंत महतो, देवकुमार, सुमार महतो, लेखिका डॉ. कुमारी शशि और छात्र नेता चंदन कुमार रजक सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
