नंदलाल तुरी
सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ़ इंडिया (एसडीपीआई) का एक प्रतिनिधिमंडल शनिवार को प्रदेश अध्यक्ष और जिला परिषद सदस्य मोहम्मद हंजेला शेख के नेतृत्व में पाकुड़ विधायक निशात आलम से उनके आवास पर मिला। प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश उपाध्यक्ष हबीबुर रहमान, प्रदेश महासचिव तहमिदुर रहमान, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य उमर फारूक और अधिवक्ता अब्दुल हन्नान शामिल थे।
प्रतिनिधिमंडल ने सबसे पहले विधायक निशात आलम को गठबंधन सरकार के एक वर्ष पूरा होने पर बधाई दी और उनकी लंबी उम्र एवं सफल नेतृत्व की कामना की। इसके बाद प्रतिनिधियों ने अलीम और फाजिल डिग्री, जिन्हें क्रमशः स्नातक और स्नातकोत्तर समकक्ष माना जाता था, की मान्यता बहाल रखने के मुद्दे पर विस्तृत चर्चा की। हाल ही में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए निर्णय ने अलीम और फाजिल डिग्रियों की वैधानिकता को लेकर अनिश्चितता पैदा कर दी है। निर्णय में कहा गया है कि ये डिग्रियाँ यूजीसी के निर्धारित मानकों को पूरा नहीं करतीं। इसके कारण सरकारी नौकरियों और उच्च शिक्षा के अवसरों पर प्रभाव पड़ रहा है, जिससे हजारों छात्रों का भविष्य खतरे में पड़ गया है।
एसडीपीआई ने रखी पाँच प्रमुख मांगें
एसडीपीआई ने राज्य सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप करने और छात्रों के हित में तत्काल कदम उठाने की मांग की। पार्टी ने अपनी प्रमुख मांगों में निम्नलिखित बिंदु शामिल किए:
डिग्रियों की मान्यता बहाल की जाए: 2023 तक JAC बोर्ड द्वारा संचालित परीक्षाओं के तहत प्राप्त अलीम और फाजिल डिग्रियों को सरकारी नौकरियों और उच्च शिक्षा में मान्यता मिले।
विश्वविद्यालय से संबद्धता: भविष्य में अलीम और फाजिल परीक्षाओं का संचालन किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से संबद्ध कर किया जाए।
अलग विश्वविद्यालय की स्थापना: पश्चिम बंगाल मॉडल पर मदरसा बोर्ड के छात्रों के लिए अलग विश्वविद्यालय बनाया जाए, जिसका नाम शेख भिखारी विश्वविद्यालय रखने का प्रस्ताव दिया गया।
मुख्यधारा से जोड़ना: मदरसा शिक्षा को आधुनिक और मुख्यधारा की शिक्षा व्यवस्था से जोड़कर छात्रों को सामान्य प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने का अवसर दिया जाए।
मदरसा बोर्ड का गठन: राज्य में पूर्णकालिक और सक्रिय मदरसा बोर्ड का गठन किया जाए, जो शिक्षा मानकों और परीक्षाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित कर सके।
एसडीपीआई ने कहा कि अलीम और फाजिल डिग्री छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए सरकार द्वारा शीघ्र निर्णय आवश्यक है। प्रतिनिधिमंडल को उम्मीद है कि विधायक इस मुद्दे को सदन में मजबूती से उठाएँगे और छात्रों के हित में सकारात्मक कदम उठाए जाएँगे।
