सिमडेगा
झारखंड के सिमडेगा जिले में चर्च में डकैती और धर्मगुरुओं पर हमले की घटना को लेकर रविवार को भारी आक्रोश देखने को मिला। हजारों की संख्या में ईसाई समुदाय के लोग, महिलाएं, पुरुष, बुजुर्ग और बच्चे सड़क पर उतर आए। उन्होंने ज़ोरदार विरोध मार्च निकाला और घटना के खिलाफ आवाज़ बुलंद की। यह आक्रोश मार्च आदिवासी जागरूकता मंच के बैनर तले आयोजित हुआ, जो सिमडेगा की मुख्य सड़कों से गुजरते हुए समाहरणालय तक पहुंचा। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने नारेबाजी करते हुए हमलावरों की जल्द गिरफ्तारी और सख्त सज़ा की मांग की।
प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन उपायुक्त को सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि कोचेडेगा थाना क्षेत्र के तुमडेगी चर्च में 2 अक्टूबर को हुई लूट और हमले में शामिल लोगों की तत्काल पहचान कर, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।
लोगों ने कहा कि गांधी जयंती जैसे दिन पर, जब देश अहिंसा का संदेश दे रहा था, उसी दिन असामाजिक तत्वों ने चर्च में घुसकर दो धर्मगुरुओं से लाखों रुपये लूट लिए और उनके साथ मारपीट की। घटना के तीन दिन बीतने के बाद भी पुलिस की चुप्पी ने समुदाय के गुस्से को और भड़का दिया है।

प्रदर्शनकारियों ने कहा – “यह सिर्फ पादरियों पर हमला नहीं, बल्कि इंसानियत पर हमला है।” उनका कहना था कि जो धर्मगुरु समाज में शिक्षा और नैतिकता के संदेशवाहक हैं, उन्हें निशाना बनाए जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
आदिवासी जागरूकता मंच के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने शीघ्र ठोस कदम नहीं उठाए, तो राज्यव्यापी आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने यह भी मांग की कि अल्पसंख्यक समुदायों, धर्मगुरुओं और ईसाई संस्थानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रावधान किए जाएं।
ज्ञापन में मांग की गई है कि इस घटना को अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम, 1989 के तहत दर्ज कर त्वरित कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
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