द फॉलोअप डेस्क
भारतीय कुश्ती संघ को लेकर खेल मंत्रालय ने बड़ी कार्रवाई की है। बीते 11 महीनों से विवादों में घिरी रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (WFI) को खेल मंत्रालय ने सस्पेंड कर दिया है।मंत्रालय ने नए अध्यक्ष संजय सिंह के सभी फैसलों पर रोक लगा दी है। जानकारी हो कि 21 दिसंबर को हुए चुनाव में बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह के करीबी संजय सिंह WFI के प्रेसिडेंट बने थे। इसके विरोध में ओलंपिक मेडलिस्ट साक्षी ने कुश्ती से संन्यास ले लिया था। वहीं बजरंग पुनिया और गूंगा पहलवान ने पद्मश्री लौटा दिया था।

नखुश ने रेसलर
WFI के चुनाव में संजय सिंह के अध्यक्ष चुने जाने से बृजभूषण के खिलाफ धरना देने वाले रेसलर नाखुश थे। दिल्ली में गुरुवार शाम को रेसलर बजरंग पूनिया, साक्षी मलिक और विनेश फोगाट ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान साक्षी मलिक भावुक हो गईं और कुश्ती छोड़ने का ऐलान कर दिया। उन्होंने अपने जूते उतारकर टेबल पर रख दिए और वहां से उठकर चली गईं। शनिवार (23 दिसंबर) को गूंगा पहलवान उर्फ वीरेंद्र सिंह ने अपना पद्मश्री लौटाने का ऐलान कर दिया। गूंगा पहलवान ने कहा है कि वे साक्षी को अपनी बहन मानते हैं। अपनी बहन की सम्मान में वे पद्मश्री लौटाने की घोषणा कर रहे हैं। कहा कि मुझे अपनी बहन साक्षी मलिक पर गर्व है।

बजरंग पूनिया ने अपना पद्मश्री पुरस्कार लौटाया
WFI के इस फैसले के खिलाफ शक्रवार को बजरंग पुनिया ने अपना पद्मश्री पुरस्कार लौटा दिया था। उन्होंने कहा कि WFI का यह चुनाव बताता है कि पहवानों का भविष्य अब सुरक्षित नहीं है। उन्होंने ट्वीट पर एक पोस्ट लिखकर अपने सम्मान को लौटाने का ऐलान किया था। उन्होंने लिखा "मैं अपना पद्मश्री पुरस्कार प्रधानमंत्री को वापस लौटा रहा हूं। कहने के लिए बस मेरा यह पत्र है लेकिन यही मेरी स्टेटमेंट है। जिन बेटियों को बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की ब्रांड अंबेसडर बनना था, उनको इस हाल में पहुंचा दिया गया कि उनको अपने खेल से ही पीछे हटना पड़ा। हम "सम्मानित" पहलवान कुछ नहीं कर सके। महिला पहलवानों को अपमानित किए जाने के बाद मैं "सम्मानित" बनकर अपनी जिंदगी नहीं जी पाउंगा। ऐसी जिंदगी कचोटेगी ताउम्र मुझे। इसलिए ये "सम्मान" मैं आपको लौटा रहा हूं।"