द फॉलोअप, रांची
राज्य के वित्त सह संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर का गुस्सा शांत होने का नाम ही नहीं ले रहा। उन्होंने प्रदेश कांग्रेस प्रभारी के राजू को लगातार दूसरे दिन भी पत्र लिख कर बम फोड़ा है। उन्होंने महिला आरक्षण संशोधन विधेयक, जंबो जेट प्रदेश कांग्रेस कमेटी, मगही और भोजपुरी को जेटेट नियमावली में क्षेत्रीय भाषा की सूची में शामिल करने जैसे कई मुद्दों को उठाया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्य प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अनुसूचित जाति परामर्शदात्री परिषद और अनुसूचित जाति आयोग को पुनर्जीवित किए जाने जैसे विषयों को उठाया है। कांग्रेस में परिवारवाद और संगठन में दलित, पिछड़ों आदिवासी, अल्पसंख्यकों के प्रतिनिधित्व पर भी प्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष को घेरा है। यह भी कहा है कि उनका यह विरोध संगठन हित में है। क्योंकि राजनैतिक संगठन का कार्य सार्वजनिक स्तर पर होता है। वह जो करते हैं, जनता को बताते हैं। यदि नहीं भी बताते हैं तो जनता जानती है। और सबसे महत्वपूर्ण बात यह कही है कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी की संख्या 314 की जगह 628 कर दीजिए, कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है। सिर्फ एक (प्रदेश अध्यक्ष) को साधिए, सब सध जाएगा।

राधाकृष्ण किशोर की नाराजगी और तल्खी अब बहुत कुछ कहने लगी है। पहली तो यह कि झारखंड प्रदेश कांग्रेस में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। सरकार में भी उनकी नहीं सुनी जा रही, पत्र से यह संकेत साफ मिल रहा है। जिस भाषा में उन्होंने पत्र लिखा है और वह पत्र सार्वजनिक हो गया है, इससे यह भी स्पष्ट हो रहा है कि वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर अब दो-दो हाथ करने को तैयार हैं। इस विरोध के लिए वह कुछ भी सहने को पूरी तरह तत्पर हैं। अब दिलचस्प यह है कि प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी के राजू उनके सवालों का जवाब देंगे। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश भी चुप्पी साधे रहेंगे। फिर राधाकृष्ण किशोर के सवालों के बाद पार्टी के अन्य कई बड़े नेता चुप बैठेंगे, जो उनकी ही तरह घुटन महसूस कर रहे हैं। और यह प्रदेश कांग्रेस को झारखंड में कितना मजबूत करेगा और उसका सरकार पर कितना और कैसा प्रभाव पड़ेगा।

हु-ब-हू पढ़िए राधाकृष्ण किशोर द्वारा के राजू को लिखा गया पत्र
आदरणीय श्री के राजू जी,
महोदन
किसी भी राजनैतिक संगठन का कार्य सार्वजनिक स्तर पर होता है। हम जी करते हैं, वह जनता को बताते हैं। यदि हम कुछ नहीं भी बताते हैं तो जनता जानती है कि पार्टी संगठन में क्या चल रहा है? यदि पार्टी हित की बात सार्वजनिक की जाए तो यह कदापि पार्टी विरोधी नहीं माना जा सकता। हाँ यदि कोई पार्टी की नीतियों, उसके सिद्धांतों का सार्वजनिक तौर पर विरोध करता हो, तो निश्चित रूम से उसे पार्टी में बने रहने का कोई अधिकार नहीं हो सकता है।
सर,
यदि प्रदेश कांग्रेस कमिटी की संख्या 314 के जगह पर 628 भी कर दिया जाए तो क्या फर्क पड़ता है। यदि पार्टी राज्य स्तर के स्थानीय मुद्दों के प्रति मौन रहे तो समिति का संख्या बल कितना भी बढ़ा दिया जाए कोई असर नहीं पड़ने वाला है। मैं कुछ विषयों की ओर अपना ध्यान आकृष्ट कराना चाहता हूं. जो निम्र है
1. आदरणीय राहूल गांधी जी ने जिस बेहतर ढंग से महिला आरक्षण संशोधन विधेयक पर लोकसभा में तर्क प्रस्तुत किया, उसे झारखण्ड प्रदेश कांग्रेस राज्य व्यापी स्तर पर भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ मुद्दा नहीं बना सकी। कांग्रेस भवन में प्रेस कांफ्रेंस करने से राज्य की महिलाओं के बीच महिला विरोधी भाजपा के बारे में संदेश नहीं दिया जा सकता है।
2. आपको विदित है कि पलामू, गहवा, चतरा, कोडरमा, गिरिडीह, गोड्डा धनबाद, बोकारो आधि निलों में मगही और भोजपुरी भाषा बोली जाती है। जबकि जेटेट में राज्य सरकार के द्वारा दोनों भाषाओं को हटा दिया गया। इस महत्वपूर्ण विषय पर प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व ने चुप्पी साध रखी।
3. झारखंड में अनुसूचित जाति की आचादी 50 लाख है। मैंने 2025-26 के बजट में विधानसभा में अनुसूचित जाति परामर्शदात्री परिषद और अनुसूचित जाति आयोग को पुनर्जीवित करने की मांग रखी थी। इन दोनों मांगों पर प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व मौन रहे।
4. हजारीबाग के विष्णुगढ़ में एक नाबालिग बच्धी के साथ बलात्कार होता है। स्थानीय स्तर पर कांग्रेस नेता अवश्य गए थे, परंतु प्रदेश कांग्रेस कमिटी कहां सोयी हुई थी?
5. हजारीबाग में तीन अल्पसंख्यकों की निर्मम हत्या कर दी गई। प्रदेश नेतृत्य कहां सोया हुआ था?
6. झारखण्ड सामाजिक न्याय का प्रदेश है। प्रदेश पार्टी नेतृत्व ये सार्वजनिक करें कि पार्टी संगठन के लिए कांग्रेसी नेताओं के परिवार को संगठन में कितना स्थान दिया गया है? श्री केशव महतो कमलेश को सार्वजनिक तौर पर यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि 314 सदस्यों की कमिटी में दलित, पिछड़ों आदिवासी, अल्पसंख्खाक और सामान्य जाति के लोगों को कितनी संख्या में स्थान दिया गया है?
7. मुझे नहीं लगता है कि मेरे द्वारा सार्वजनिक स्तर पर रखे गए उपरोक्त विषय पार्टी विरोधी है। फिर भी यदि आपको ऐसा लगता है, तो आपका जो भी निर्णय होगा मुझे स्वीकार है।
8. सर,
एक को साधिए, झारखण्ड कांग्रेस में सब सध जाएगा।
