गिरिडीह
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन गिरिडीह के हरसिंहरायडीह स्थित स्वर्गीय सुदिव्य कुमार सोनू के आवास पहुंचे। उन्होंने स्वर्गीय सुदिव्य कुमार सोनू के पार्थिव शरीर पर पुष्प चक्र अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी तथा शोक संतप्त परिजनों से मुलाकात कर अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वर्गीय सुदिव्य सोनू का आकस्मिक निधन अत्यंत पीड़ादायक है। यह झारखंड के लिए अपूरणीय क्षति है। उनके निधन से राज्य ने एक कर्मठ जनप्रतिनिधि, समर्पित मंत्री एवं युवा नेतृत्व को खो दिया है। उन्होंने कहा कि स्वर्गीय सुदिव्य सोनू के योगदान और सेवाओं का सदैव स्मरण किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने दिवंगत आत्मा की शांति तथा शोकाकुल परिवार को इस कठिन समय में धैर्य एवं संबल प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की। मौके पर विधायक कल्पना सोरेन ने भी स्वर्गीय सुदिव्य कुमार के पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
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37 वर्ष पहले JMM के एक प्राथमिक सदस्य के रूप में शुरू किया था सियासी सफर
गौरतलब है कि हेमंत सोरेन कैबिनेट में मंत्री और गिरिडीह सदर के विधायक सुदिव्य कुमार सोनू का निधन 6 सितंबर 2026 की सुबह हो गया। उनके निधन के साथ झारखंड की राजनीति में एक ऐसी राजनीतिक यात्रा का अंत हुआ, जिसकी शुरुआत करीब 37 वर्ष पहले झारखंड मुक्ति मोर्चा के एक प्राथमिक सदस्य के रूप में हुई थी। उनका जीवन कभी सामान्य नहीं रहा। खासकर राजनीतिक जीवन। झामुमो में शामिल होने के बाद उन्होंने संगठन में काम किया, गिरिडीह नगर इकाई की जिम्मेदारी संभाली, विधानसभा चुनाव लड़े और लगातार दो बार हार का सामना किया। इसके बाद 2019 में पहली बार विधायक बने और 2024 में लगातार दूसरी बार चुनाव जीतने के बाद झारखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री बने। वहीं, सीएम हेमंत सोरेन के लिए ये अलग से दुखद इसलिए है कि सुदिव्य सोनू, उनके साथ चलने वाले, पांचवें ऐसे नेता थे, जिनका जनता के बीच सीधा प्रभाव और पहुंच था और जो अब हमारे बीच नहीं हैं। इस कड़ी में दिवंगत हाजी हुसैन अंसारी, जगरनाथ महतो, राजेंद्र सिंह, रामदास सोरेन को याद किया जा सकता है।

JPSC-JSSC विवाद के दौरान छात्रों से बातचीत
मंत्री के रूप में सुदिव्य कुमार सोनू की भूमिका वर्ष 2026 में उस समय विशेष रूप से सामने आई, जब झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं तथा भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर छात्रों का आंदोलन चल रहा था। उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री होने के कारण वे सरकार की ओर से छात्रों के साथ बातचीत करने वाले प्रमुख चेहरों में शामिल रहे। परीक्षा रद्द करने, कुछ परीक्षाओं को स्थगित करने और जांच से जुड़े फैसलों की जानकारी छात्रों तक पहुंचाने की प्रक्रिया में उनकी भूमिका रही। राज्य सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच बातचीत के दौरान वे एक महत्वपूर्ण वार्ताकार के रूप में सामने आए।

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