द फॉलोअप डेस्क
मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू की दो बेटियां और एक बेटा है। पिता होने के नाते उनके मन में भी अपनी बड़ी बेटी के विवाह को लेकर कई सपने थे। वह चाहते थे कि अपनी आंखों के सामने, अपने जीवनकाल में बच्ची का विवाह करें और उसे खुशी-खुशी विदा करें। लेकिन बेटी के हाथ पीले करने का उनका यह अरमान अब अधूरा ही रह गया। अपने जीवन के आखिरी दिनों में मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने मंत्री दीपिका पांडेय से भी अपनी बेटी की शादी की इच्छा का जिक्र किया था। बेटी के विवाह को लेकर उनके मन में कई योजनाएं थीं। अपने पारिवारिक दायित्वों को पूरा करने को लेकर वह उत्साहित थे।

बरगद सा छांव बेटी के सिर उठ गया
शायद उन्हें भी नहीं पता था कि जिन सपनों और तैयारियों की बातें वह कर रहे हैं, उन्हें पूरा करने का वक्त उन्हें नहीं मिल पाएगा। जिस भी पिता की बेटी होती है, उसके मन में कहीं न कहीं यह अरमान जरूर होता है कि वह अपने जीते जी अपनी बच्ची का विवाह करे। उसके हाथ पीले करे और उसे एक नई जिंदगी की शुरुआत करते हुए देखे। लेकिन सुदिव्य सोनू की बेटी के लिए पिता का यूं अचानक चले जाना उस सिर से छत छिन जाने जैसा है, जिसके साए में उसने जीवन देखा था। पिता बेटी के लिए उसका सहारा, उसकी ताकत और बरगद की उस छांव की तरह होता है, जिसके नीचे वह खुद को सुरक्षित महसूस करती है। ऐसे में जिंदगी के उस मोड़ पर, जब पिता अपनी बेटी की शादी के सपने संजो रहे थे, उनका अचानक दुनिया से चले जाना परिवार के लिए बेहद पीड़ादायक और किसी बड़ी त्रासदी से कम नहीं है।

शब्दों में बयां कर पाना मुश्किल
बेटी के विवाह को लेकर सुदिव्य सोनू के मन में कई योजनाएं थीं। परिवार की खुशियों और अपनी जिम्मेदारियों को लेकर उनके मन में उत्साह था। लेकिन किसे पता था कि बेटी के हाथ पीले करने का उनका सबसे बड़ा अरमान अधूरा रह जाएगा। जिस पिता के मन में अपनी बेटी की शादी को लेकर सपने थे, तैयारियों की बातें थीं और भविष्य की खुशियां थीं, उनका अचानक चले जाना परिवार के लिए ऐसा दुख छोड़ गया है, जिसे शब्दों में बयां करना आसान नहीं। बताते चलें कि सुदिव्य सोनू की दो बेटियां और एक बेटा है। झारखंड सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के आकस्मिक निधन ने उनके राजनीतिक सहयोगियों, समर्थकों और परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। उनके निधन के बाद उनके करीबी सहयोगियों को उनसे जुड़ी बातचीत और मुलाकातें बार-बार याद आ रही हैं