द फॉलोअप डेस्क
झारखंड सरकार को नहीं मालूम कि सचिवालयों में कितने सचिवालय कर्मी कार्यरत हैं। यह कहानी कार्मिक और प्रशासनिक सुधार विभाग की है। इस विभाग के आंकड़े पूरी तरह अधूरे हैं। समय समय पर सृजित किए गए पदों को कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग ने अपडेट नहीं किया है। सृजित पदों को जोड़ कर अंतिम आंकड़े को दुरुस्त नहीं किया है। इस कारण कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग के आंकड़े में एएसओ, एसओ, अवर सचिव और उप सचिव के सृजित कुल पदों गलत दर्शा रहे हैं। उसी गलत आंकड़े पर कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग प्रमोशन भी देते जा रहा है। हालांकि अन्य विभागों में सृजित पदों के आंकड़े में भी विसंगति से इंकार नहीं किया जा रहा है।
क्या है मामला
वर्ष 2010 में झारखंड सचिवालय सेवा नियमावली का गठन किया गया। उस समय एएसओ के कुल 1313, एसओ के 657, अवर सचिव के 328, उप सचिव के 33 और संयुक्त सचिव के कुल 10 पद सृजित दिखाए गए। हालांकि 2015 में उप सचिव और संयुक्त सचिव के सृजित पदों में वृद्धि हुई। उसके बाद उप सचिव के पदों की संख्या बढ़ कर 33 से 53 और संयुक्त सचिव के 10 से बढ़ कर 23 हो गया। इस आंकड़े को दुरुस्त भी कर लिया गया। लेकिन 2010 के बाद विभिन्न अलग अलग विभाग समय समय पर एएसओ के पदों में वृद्धि का प्रस्ताव देता रहा। उस पर पदवर्ग समिति की स्वीकृति के बाद कैबिनेट की भी मुहर लगती गयी। इस तरह पद बढ़ते गए लेकिन कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग के आंकड़े वही रहे।
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एएसओ के 148 पद मिसिंग हैं
जानकारी के अनुसार कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग के आंकड़े में एएसओ के अभी भी 148, एसओ के 70, अवर सचिव के 21 और उप सचिव के 03 पद मिसिंग हैं। सृजित पदों के आंकड़े गलत होने से उसी अनुरूप प्रमोशन के लिए जरूरी पदों की संख्या भी गलत दर्शायी और उसी अनुरूप गलत प्रमोशन भी दिए जा रहे हैं।
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