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शराब घोटाले की जांच में सरकार पर लापरवाही का आऱोप, बाबूलाल मरांडी ने की CBI जांच की मांग

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रांची
राज्य में हुए बहुचर्चित शराब घोटाले को लेकर राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को एक पत्र लिखकर शराब घोटाले की जांच में जानबूझकर की जा रही लापरवाही और ACB (एंटी करप्शन ब्यूरो) में हुए "संदेहास्पद फेरबदल" पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूरे मामले की CBI से निष्पक्ष जांच कराने की माँग की है।
मरांडी ने आरोप लगाया है कि इस घोटाले में राज्य के राजस्व को सैकड़ों करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है और एक संगठित गिरोह ने तंत्र को नियंत्रित कर भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया। उन्होंने पत्र में स्पष्ट रूप से कहा है कि घोटाले में निलंबित आईएएस अधिकारी विनय कुमार चौबे, JSBCL के तत्कालीन महाप्रबंधक सुधीर कुमार दास, कारोबारी सिद्धार्थ सिंघानिया, और नकली होलोग्राम आपूर्तिकर्ता विधू गुप्ता जैसे कई नाम शामिल हैं।


ACB पर लगाए गंभीर आरोप
मरांडी ने आरोप लगाया कि ACB ने समय पर चार्जशीट दाखिल नहीं की, जिससे लगभग सभी प्रमुख आरोपी जमानत पर छूट गए। उन्होंने इसे "सुनियोजित साजिश" बताते हुए कहा कि यह न केवल लापरवाही है, बल्कि भ्रष्टाचारियों को बचाने का प्रयास भी प्रतीत होता है।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि जब ACB का नेतृत्व बदला गया, उसी दिन पाँच अधिकारियों के तबादले कर दिए गए, जिससे संदेह और गहराया है। उन्होंने मुख्यमंत्री से तीन प्रमुख सवाल पूछे:
1.    ACB से हटाए गए अधिकारियों की भूमिका क्या थी और वे किसके लिए काम कर रहे थे?
2.    उन्हें किसके कहने पर ACB में नियुक्त किया गया और किसके निर्देश पर हटाया गया?
3.    वर्तमान में वे कहाँ पदस्थ हैं और किसके हित में कार्य कर रहे हैं?
CBI जांच की माँग
बाबूलाल मरांडी ने पूरे मामले की CBI से निष्पक्ष जांच कराने, समय पर चार्जशीट न दाखिल करने वाले ACB अधिकारियों की भूमिका की जांच और ACB में हुए हालिया तबादलों के पीछे के कारणों की जांच के साथ-साथ इन अधिकारियों की संपत्तियों की भी जांच की मांग की है। पत्र के अंत में मरांडी ने लिखा है कि यदि इस प्रकरण पर तत्काल और ठोस कार्रवाई नहीं होती, तो यह माना जाएगा कि इस महाघोटाले को सरकार का संरक्षण प्राप्त है।

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