रांची
राज्य में सूचना आयुक्तों के पद पर नियुक्ति संबंधी राज्य सरकार के प्रस्ताव पर 11 दिन बाद भी राज्यपाल की मुहर नहीं लग पायी है। लोक भवन ने राज्य सरकार द्वारा भेजे गए प्रस्ताव को लौटाया भी नहीं है। इससे सूचना आयुक्तों की नियुक्ति पर लोक भवन की सामान्य सहमति मिलने की संभावना कम होती जा रही है। यहां मालूम हो कि 25 मार्च को मुख्यमंत्री आवास में सूचना आयुक्तों की नियुक्ति को लेकर चयन समिति की बैठक हुई थी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्रतिपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी और मंत्री हफीजुल हसन शामिल हुए थे। इस बैठक में सूचना आयुक्त के नामों पर सर्वसम्मति नहीं बन सकी। अगले दिन अनौपचारिक बैठक में बनायी गयी सहमति के बाद राज्य सरकार ने नियुक्ति संबंधी प्रस्ताव स्वीकृति के लिए लोक भवन भेज दिया। उसमें वरिष्ठ पत्रकार अनुज सिन्हा,झामुमो नेता तनुज खत्री, भाजपा नेता शशिभूषण पाठक, कांग्रेस नेता अमूल्य नीरज खलखो के अलावा धर्मवीर सिन्हा के नाम शामिल बताए गए।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार प्रस्ताव में कई राजनीतिक व्यक्तियों के नाम शामिल होने की वजह से राज्यपाल राज्य सरकार के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार विमर्श कर रहे हैं। वह विधिक परामर्श ले रहे हैं। क्योंकि सूचना आयुक्त पद के अभ्यर्थियों का नाम सार्वजनिक होने के बाद लगभग आधा दर्जन लोगों और संस्थाओं ने लोक भवन से सरकार द्वारा भेजे गए नामों पर आपत्ति दर्ज करायी है। नामों के चयन में सूचना अधिकार अधिनियम और सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन बताया है। खास कर राजनीति दलों से सीधे जुड़े लोगों के नाम को नियम विरुद्ध बताया है। इसके अलावा अनुशंसित नामों में कुछ नेताओं के विरुद्ध दर्ज मामलों का भी जिक्र किया गया है। इस कारण लोक भवन कोई भी निर्णय लेने से पहले पूरी तरह आश्वस्त होना चाहता है। जानकार सूत्रों का कहना है कि संभव है कि राज्यपाल किसी नाम पर आपत्ति किए बगैर अधिनियम के प्रावधान और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आलोक में राज्य सरकार को पुनर्विचार का सुझाव दे सकते हैं।
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