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 Maa Lalita PolyDoc : महानगरों में मिलने वाली आधुनिकतम लैप्रोस्कोपिक तकनीक से यहां मरीज को मिली नयी जिंदगी 

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द फॉलोअप, रांची
Maa Lalit PolyDoc अस्पताल की टीम ने एक ऐसा ऑपरेशन किया है जिसकी सुविधा पहले महानगरों में ही उपलब्ध थी। रांची के कचहरी चौक के पास रहनेवाले 38 वर्षीय दिवाकर कुमार बचपन से बार बार होनेवाले इन्फेक्शन, बुखार, खून की कमी से परेशान थे। इसके कारण उन्हें बार बार खून चढ़ाना पड़ता था। साथ ही उन्हें हाई लेवल जॉडिंस की भी शिकायत रहती थी। इसका लेवल 40 तक चला जाता था, जिसे चिकित्सीय भाषा में खतरनाक माना जाता है। फिजिशियन ने लंबी इलाज के बाद उन्हें Spleen हटवाने की सलाह दी जो काफी समय से उन्हें परेशान किए हुए था। वह अपनी सामान्य साइज से दो गुणा (20 सेंटीमीटर) हो गया था। इससे मरीज का पेट भारी और भरा हुआ लगता था। मरीज को भूख भी नहीं लगती थी।


अस्पताल के मुख्य सर्जन डॉ अजीत कुमार के अनुसार इस बीमारी को Tropical Massive Splenomegaly (with Hypersplenism ) कहा जाता है,जिसमें मरीज को बार-बार इंफेक्शन होता है साथ ही साथ हीमोग्लोबिन, प्लेटलेट ,WBC काउंट काफी कम हो जाता था और जॉन्डिस यानी बिलीरुबिन/ Bilirubin का लेवल 40 तक चला जाता है। डॉक्टरों की सलाह पर वह मां ललिता पालीडॉक, जय प्रकाश नगर, बरियातू, के चिकित्सक के पास आए।  इससे पहले उनकी पीत की थैली का ऑपरेशन  डॉ अजीत कुमार के द्वारा ही किया गया था। इसलिए उन्होंने उनसे दोबारा संपर्क किया और ऑपरेशन करवाने का निर्णय लिया। अस्पताल की टीम ने इस चैलेंज को स्वीकार किया। क्योंकि Spleen की साइज काफी बड़ी थी। लैप्रोस्कोपी से करना एक बहुत बड़ा चैलेंज था। डॉ अजीत के अनुसार, हम लोगों ने सफलतापूर्वक इस कार्य को अंजाम दिया ,और मरीज का बड़ा ऑपरेशन होने से बचा लिया ,जिससे उसे पूरी जिंदगी बहुत आराम मिलेगी। मरीज अब बिल्कुल ठीक-ठाक है। उनका टांका काटकर डिस्चार्ज कर दिया गया। छुट्टी जाते समय उनके  Blood Cell का लेबल सामान्य हो गया था। आपरेशन से पहले Platelet count 20000 था जो छुट्टी के समय बढकर एक लाख से उपर चला गया है जिसे सामान्य कहा जाता है।

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