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चाईबासा में IED की चपेट में आए दूसरे घायल हाथी की भी मौत, अब सवालों के घेरे में वन विभाग 

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द फॉलोअप डेस्क

नक्सल प्रभावित सारंडा के घने जंगलों में नक्सलियों द्वारा लगाये गये आईईडी की चपेट में आकर आज फिर एक हाथी की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि समय पर उचित इलाज नहीं मिलने के कारण इस हाथी की मौत हुई है। ऐसे में अबतक आईईडी की चपेट में आए दो हाथियों की मौत इलाज के अभाव में हो चुकी है।

दरअसल, आज जिस हाथी की मौत हुई, उसने असहनीय पीड़ा से दम तोड़ दिया। इससे पहले आईईडी की चपेट में आये 6 वर्षीय मासूम हाथी की मौत विगत शनिवार को हुई थी। अब सारंडा वन क्षेत्र में आईईडी के चपेट में आकर लगातार हाथी बुरी तरह घायल हो रहे है। तिरिलपोसी चेक डैम के समीप इस हाथी को घायल अवस्था में पाया गया था। दो दिन पहले इसे वन विभाग ने ट्रेस कर लिया था। जिसकी पुष्टि सारंडा वन प्रमंडल के डीएफओ अभिरूप सिन्हा ने की थी।
वहीं, आज हुई दूसरी हाथी की मौत के बाद वन विभाग सवालों के घेरे में है। ऐसे में सारंडा के बीहड़ जंगल में लगातार घायल हो रहे हाथियों के मामले में वन विभाग निश्चिंत है। वहीं, हाथियों की बढ़ती असुरक्षा वन्यजीव संरक्षण को लेकर भी सवाल खड़े करता है।

बताया जा रहा है कि इस घायल हाथी को ट्रेस करने के बाद वन विभाग की वेटनरी टीम द्वारा उसे प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया जा रहा था। वहीं, बुधवार से उसका विधिवत उपचार प्रारंभ किया जाना था। इसके लिए गुजरात के वनतारा से संपर्क किया गया था। 
बता दें कि दोनों बार हाथियों के आईईडी से घायल होने पर वन विभाग के द्वारा गुजरात के जामनगर स्थित देश की सबसे बड़ी वन्यजीव रेस्क्यू टीम वनतारा से संपर्क साधा गया। लेकिन, यह घायल हाथियों के जान बचाने के लिए नकाफी साबित हुई। पहले हाथी के घायल होने के आठ दिन बाद वनतारा की टीम पहुंची थी। टीम के इलाज प्रारंभ करने के कुछ देर बाद ही हाथी ने दम तोड़ दिया था। वहीं, दूसरे हाथी के घायल होने की भी सूचना वन विभाग की ओर से वनतारा को उपलब्ध कराई गई। बताया जा रहा है कि टीम के पहुंचने के बाद हाथी का विधिवत उपचार किया जाना था। उसके बाद ही हाथी को ट्रेंकुलाइज कर सुरक्षित ढंग से इलाज की प्रक्रिया पूरी की जानी थी। लेकिन, इससे पहले ओडिशा और मनोहरपुर के वेटनरी डॉक्टरों की टीम मिलकर घायल हाथी का इलाज कर रहे थे। इसी क्रम में मंगलवार को कटहल और लौकी में मिलाकर हाथी को दवाई खिलाया गया था। लेकिन, बावजूद इसके बुधवार को हाथी की मौत हो गई। वर्तमान नियमों के अनुसार हाथी को केवल एक बार ही ट्रेंकुलाइज किया जा सकता है। 
बताया जा रहा है कि मृत हाथी को समता वन प्रक्षेत परिसर स्थित जराईकेला लाया जा रहा है। इसके बाद कल सुबह पोस्टमार्टम कर उसे दफनाया जाएगा। इधर, सारंडा में घायल हाथी की मौत से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है। वही इस पर सारंडा के ग्रामीण ने विगत दो दिनों से हाथी के स्वास्थ्य होने की कामना कर रहे थे। साथ ही पूरे सारंडा के ग्रामीण हाथी के स्वास्थ्य होने के लिए अपने-अपने घरों में चुल्हा तक नहीं जलाया था।


 

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