द फॉलोअप डेस्क
केंद्र सरकार द्वारा जीएसटी स्लैब में कमी की घोषणा पर झारखंड प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता सोनाल शांति ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि "देश में सरकार भले ही एनडीए की है, लेकिन सिस्टम कांग्रेस का चल रहा है। दूध, दही, पेंसिल, किताबों, कृषि उपकरण, जीवन रक्षक दवाओं, स्वास्थ्य और जीवन बीमा जैसी आवश्यक वस्तुओं पर जीएसटी लगाकर कमाई करने वाली अंधी सरकार को आठ वर्षों बाद आम आदमी की तकलीफ नजर आने लगी है।"
उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की जीएसटी नीति का कांग्रेस शुरू से ही विरोध करती रही है। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 2016 में ही इसके खिलाफ अपनी आवाज उठाई थी। कांग्रेस ने जीएसटी के कारण आम उपभोक्ता, किसान और छात्र वर्ग पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषण कर केंद्र सरकार को आगाह किया था, लेकिन मोदी सरकार ने जनहित की चिंताओं को दरकिनार कर उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से अव्यवस्थित और जटिल जीएसटी स्लैब लागू किया। सोनाल शांति ने कहा कि "मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में जातिगत जनगणना और जीएसटी स्लैब संशोधन जैसे फैसलों से यह स्पष्ट हो गया है कि कांग्रेस की नीतियां ही जनहितैषी थीं, जबकि भाजपा की नीतियां जनविरोधी रही हैं।"
उन्होंने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि "जीएसटी को व्यवहारिक साबित करने के लिए मोदी सरकार के नुमाइंदों ने हर तरह के कुतर्क दिए, लेकिन अब खुद को अपने ही फैसले से पीछे हटना पड़ रहा है। इससे यह भी सिद्ध हो गया कि देश की अर्थव्यवस्था और भविष्य उन मंत्रियों और सलाहकारों के हाथों में था, जो पूरी तरह नाकाम साबित हुए।" उन्होंने आगे कहा कि किसानों और आम करदाताओं से लंबे समय तक उच्च दरों पर टैक्स वसूला गया, जिससे एक ओर आम घरों का बजट बिगड़ा तो दूसरी ओर कृषि उत्पादन लागत में भारी वृद्धि हुई।
कांग्रेस प्रवक्ता ने केंद्र सरकार से मांग की कि नई जीएसटी नीति के कारण जिन विनिर्माता राज्यों को राजस्व की क्षति हो सकती है, उसकी समय पर भरपाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि नए संशोधनों से क्षेत्रीय विकास का संतुलन न बिगड़े और आर्थिक असंतुलन की स्थिति उत्पन्न न हो। अंत में उन्होंने कहा कि "कांग्रेस देश में सकारात्मक विपक्ष की भूमिका निभा रही है और आगे भी जनहित के मुद्दों को पूरी मजबूती से उठाती रहेगी।"
