द फॉलोअप डेस्क
राज्य की बहुचर्चित पेसा नियमावली पर आज हाईकोर्ट में सुनवाई नहीं हुई। सरकार की ओर से अधिवक्ता ने कोर्ट से समय मांग ली। कोर्ट से आग्रह किया कि महाधिवक्ता राजीव रंजन आज नहीं है। वह इस सुनवाई में खुद शामिल होना चाहते हैं। इसलिए कोर्ट कल बुधवार को सुनवाई करे तो अच्छा होगा। कोर्ट ने सरकार के इस आग्रह को स्वीकार कर लिया। इस तरह पेसा नियमावली पर बुधवार को हाईकोर्ट में सुनवाई होगी। कोर्ट की कल होनेवाली सुनवाई इसलिए भी काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि बालू घाटों व माइनर मिनरल के टेंडर के बाद उसके आवंटन पर हाईकोर्ट ने रोक लगा रखी है। इधर पंचायती राज विभाग ने पेसा नियमावली पर स्वीकृति के लिए प्रस्ताव कैबिनेट को भेज दिया है। लेकिन अभी भी कई सारी त्रुटियों की वजह से बुधवार को होनेवाली कैबिनेट की बैठक में पेसा नियमावली पर मुहर लगने की संभावना बहुत कम है।

जानकारी के अनुसार पंचायती राज विभाग द्वारा पेसा नियमावली का कैबिनेट को भेजे गए ड्राफ्ट में अभी भी सात विभागों के मंतव्य नहीं हैं। इनमें वित्त विभाग के अलावा मुख्यमंत्री के अधीन वाले उत्पाद, खान व भूतत्व, गृह एवं आपदा प्रबंधन, महिला एवं बाल विकास विभाग, वन एवं पर्यावरण व अन्य विभाग शामिल हैं। मालूम हो कि पिछले दिनों मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पेसा नियमावली के लंबित मामले पर विभागीय सचिवों के साथ बैठक की थी। उन्होंने पंचायती राज विभाग को भी पेसा नियमावली के ड्राफ्ट को छोटा करने का निदेश दिया था। जिसके बाद पंचायती राज विभाग ने ड्राफ्ट को 31 पृष्ठों से घटा कर 23 कर दिया है। लेकिन अन्य सात विभागों ने अभी तक अपना मंतव्य नहीं दिया है।
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इधर कई विषयों पर अभी भी पंचायती राज विभाग और अन्य विभागों में मतांतर की स्थिति है। मसलन विधि विभाग ने अपने मंतव्य में पंचायतों से जुड़ी योजनाओं को ही ग्राम सभा के माध्यम से कार्यान्वित कराने का सुझाव दिया है। वहीं पंचायती राज विभाग ने विभागीय योजनाएं, जो ग्राम सभा के माध्यम से कार्यान्वित हो रही हैं, उन्हें भी शामिल करने का सुझाव दिया है। लाभुकों के चयन मामले में भी पंचायती राज विभाग ने विभागीय चयन पद्धति को उपयुक्त माना है। अलग से इसके लिए नियम बनाने की जरूरत नहीं बतायी है। इसी तरह वैसी बड़ी योजनाएं जो दो जिलों से जुड़ी हो, उसे ग्राम सभा के बदले जिला परिषदों से स्वीकृति लेने का प्रावधान किया है। वहीं छोटी छोटी योजनाएं जो दो पंचायतों से जुड़ी हों, उसे पंचायत समितियों के माध्यम से कार्यान्वित कराने की बात कही गयी है।
