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मानव–हाथी संघर्ष पर लगेगा विराम, 17 कॉरिडोर बचाने को साथ आए 6 राज्य

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द फॉलोअप डेस्क
झारखंड में 17 एलिफेंट कॉरिडोर चिहिन्त किया गया है। इनसभी को बचाने के लिए 6 राज्य साथ में मिलकर काम करेंगे। इसमें बिहार,झारखंड,ओडिशा,उत्तर प्रदेश,पं.बंगाल और छत्तीसगढ़ शामिल है। ये 6 राज्य इन कॉरिडोर से हाथियों के आवागमण को आसान बनाने के लिए योजना बनाएंगे। इसके लिए राज्यों को केवल केंद्र सरकार से निर्देश का इंतजार है। एलिफेंट कॉरिडोर झारखंड की बहुप्रतीक्षित मांग रही है। खनिज संपदा से परिपूर्ण झारखंड में संरक्षित क्षेत्र का विस्तार चुनौतीपूर्ण और बहुप्रतिक्षित है।

 
भोजन का प्रर्याप्त आधार कराया जाएगा उपलब्ध 
भारतीय वन्यजीव संस्थान ने देश भर में हाथियों की गतिविधियों के आधार पर मौका मुआयना करने के बाद एलिफेंट कॉरिडोर्स ऑफ इंडिया 2023 रिपोर्ट केंद्र को सौंपी। कॉरिडोर की सूची राज्यों को उपलब्ध करा दी गई है। झारखंड के भीतर और दूसरों राज्यों से जुड़े 17 एलिफेंट कॉरिडोर मान्य किए गए हैं। अब ये गलियारे जहां-जहां खंडित हैं, उसे चिह्नित कर अक्षुण्ण किया जाएगा। कॉरिडोर में गैर मजरुआ भूमि, निजी भूमि पर भी हाथियों के मार्ग को अवरोध मुक्त बनाते हुए हाथियों के भोजन का प्रर्याप्त आधार उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि हाथियों का झुंड अपने मार्ग से भटके नहीं। देश में कुल वन क्षेत्र का 22.93 फीसदी संरक्षित है जबकि झारखंड में केवल 9.20 फीसदी संरक्षित वन क्षेत्र हैं। भौगोलिक क्षेत्र की बात करें तो झारखंड का केवल 2.72 प्रतिशत और देश का 4.89 फीसदी हिस्सा संरक्षित है।


झारखंड में ये चिह्नित प्रमुख एलिफेंट कॉरिडोर
भागाबिल्ला - रत्नसाई कॉरिडोर, जामपानी-भागाबिला कॉरिडोर, सियालजोरा- धोबाधोबिन कॉरिडोर, संगाजाता-हल्दीपोखर कॉरिडोर, सरायकेला से चाईबासा में हल्दीपोखर रेंज तक, लेपांग- डुमुरिया कॉरिडोर, अंकुआ-अंबिया कॉरिडोर, रायबेरा-पुलबाबुरू कॉरिडोर, डालापानी-सुकलारा कॉरिडोर, दलमा-चांडिल कॉरिडोर, दलापानी - काकराझोर अंतरराज्यीय कॉरिडोर, डुमरिया-नयाग्राम कॉरिडोर, सिल्ली अनगरा, भरनो-बेरो-कारा, दलमा- आसनबनी, दलमा रुगाई, अंजादबेरा-बिचाबुरु कॉरिडोर, डुमरिया-कुंडलुका और मुरकंजिया कॉरिडोर