द फॉलोअप, रांची
उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अनुपालन करते हुए डीजीपी की नियुक्ति के लिए यूपीएससी को आईपीएस अधिकारियों का पैनल भेजा है। इस पैनल पर विचार करने के लिए यूपीएससी की 26 मई को बैठक होगी। इस बैठक में यूपीएससी सभी पैमानों पर गहराई से विचार करने के बाद, योग्यता और वरिष्ठता के आधार पर सबसे उपयुक्त अधिकतम 3 अधिकारियों का एक अंतिम पैनल तैयार कर राज्य सरकार को भेज देगी। उसके बाद राज्य सरकार उस पैनल से किसी एक आईपीएस अधिकारी को डीजीपी बना सकता है। यूपी द्वारा यूपीएससी को डीजीपी के चयन के लिए पैनल भेजे जाने के बाद अब झारखंड के लिए भी यह दृष्टांत महत्वपूर्ण हो गया है। क्योंकि झारखंड द्वारा गठित नयी नियुक्ति नियमावली युपी और तेलंगाना की तर्ज पर है।

यहां मालूम हो कि प्रकाश सिंह बनाम केंद्र सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट ने डीजीपी की नियुक्ति के लिए राज्य सरकारों को एक नियमावली बनाने का निर्देश दिया था। ताकि इस पद पर नियुक्त होनेवाला अधिकारी स्वतंत्र रूप से कम से कम दो साल तक काम कर सके। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राज्य सरकारों ने नियमावली का गठन करते हुए डीजीपी की नियुक्ति के लिए यूपीएससी को पैनल भेजने लगा। उसी प्रक्रिया के तहत नियुक्ति होने लगी। लेकिन बाद में अलग अलग राज्य सरकारों ने अपने अपने ढंग से नियुक्ति नियमावली बना लिया। यूपी ने भी 2024 में उत्तर प्रदेश पुलिस महानिदेशक (चयन एवं नियुक्ति) नियमावली, 2024 का गठन किया। इस नई नियमावली के माध्यम से उत्तर प्रदेश सरकार ने डीजीपी के चयन का अधिकार केंद्र से लेकर राज्य स्तर पर एक स्वतंत्र समिति को सौंप दिया। इस तरह डीजीपी का चयन संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा नहीं, बल्कि राज्य स्तर पर गठित एक 5-सदस्यीय समिति द्वारा किया जाने लगा। इस समिति के अध्यक्ष हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश होते हैं। इसके अलावा मुख्य सचिव, यूपी लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या प्रतिनिधि, एक सेवानिवृत्त डीजीपी और गृह विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होते हैं। यूपी के अलावा पश्चिम बंगाल व कई अन्य राज्यों ने भी इसी तरह की नियमावली बना कर डीजीपी की नियुक्ति करने लगा।

इसी तरह तेलंगाना और उत्तर प्रदेश की तर्ज पर झारखंड सरकार ने भी 'झारखंड पुलिस महानिदेशक और महानिरीक्षक (चयन एवं नियुक्ति) नियमावली का गठन किया। नयी नियमावली में डीजीपी के चयन के लिए यूपीएससी को अधिकारियों की सूची भेजने के बजाय राज्य स्तर पर एक विशेष चयन समिति का गठन किया गया। अध्यक्ष हाई कोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश इसके अध्यक्ष होते हैं। मुख्य सचिव, यूपीएससी द्वारा नामित एक सदस्य, जेपीएससी (JPSC) अध्यक्ष या उनके प्रतिनिधि और एक सेवानिवृत्त डीजीपी शामिल होते हैं। गृह विभाग के सचिव इसके सदस्य-सचिव होते हैं। डीजीपी की नियुक्तियों को लेकर दायर विभिन्न याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी 2026 में बेहद सख्त फैसला सुनाया था।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सभी राज्यों को अनिवार्य रूप से यूपीएससी-अधिदेशित (UPSC-mandated) प्रक्रिया का ही पालन करना होगा और कार्यवाहक या अपनी मर्जी से बनाए गए डीजीपी की संस्कृति को खत्म करना होगा। इसके बाद यूपी ने अपना स्टैंड बदला। अब झारखंड की बारी है। मालूम हो कि अनुराग गुप्ता के बाद तदाशा मिश्रा को पहले प्रभारी और बाद में नियमावली में संशोधन कर नियमित डीजीपी बनाए जाने को लेकर भी विवाद उभरा था। आईपीएस तदाशा मिश्रा की आधिकारिक सेवानिवृत्ति 31 दिसंबर 2025 को तय थी। झारखंड सरकार ने उनकी सेवानिवृत्ति से ठीक एक दिन पहले (30 दिसंबर 2025) को उन्हें राज्य का पूर्णकालिक (नियमित) डीजीपी नियुक्त कर दिया। नए नियमों के तहत पूर्णकालिक डीजीपी बनते ही उन्हें 2 वर्ष का सेवा विस्तार (कार्यकाल सुरक्षा) मिल गया।
