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जल से विकास की राह: उपायुक्त ने जलाशयों का निरीक्षण कर कृषि सशक्तिकरण का बनाया खाका

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गुमला

गुमला जिले में कृषि को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से उपायुक्त दिलेश्वर महत्तो ने विभिन्न जलाशयों और नहर तंत्र का करीब सात घंटे तक निरीक्षण किया। निरीक्षण की शुरुआत कतरी जलाशय से हुई, जहां उन्होंने नहरों और डिस्ट्रीब्यूटरी सिस्टम का जायजा लेते हुए खेतों तक निर्बाध जलापूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने रबी समेत सभी फसली चक्र में किसानों को पर्याप्त सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने पर जोर देते हुए सोलर लिफ्ट इरिगेशन, सोलर पंप और किसान समृद्धि योजना के तहत लाभ देने की बात कही।

नहर मरम्मति, सोलर सिंचाई और मत्स्य विकास को बढ़ावा
निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने नहरों की मरम्मति के लिए डीपीआर तैयार करने, सोलर आधारित सिंचाई संसाधन उपलब्ध कराने और जलाशय रखरखाव में लगे कर्मियों के पारिश्रमिक सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही मत्स्य विकास को बढ़ावा देने के लिए मत्स्यपालक समूहों के गठन, केज निर्माण और स्थानीय लोगों को मत्स्य पालन के लिए प्रेरित करने पर जोर दिया। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि जलाशयों के आसपास की कोई भी भूमि अनुपयोगी न रहे और उसे कृषि व अन्य गतिविधियों से जोड़ा जाए।

79 किमी नहर नेटवर्क के जीर्णोद्धार और मसरिया जलाशय पर फोकस
घाघरा प्रखंड के विभिन्न क्षेत्रों में क्षतिग्रस्त नहरों और डैम संरचनाओं का निरीक्षण करते हुए उपायुक्त ने लीकेज मरम्मति, डिसिल्टिंग और पुनर्निर्माण के लिए एक सप्ताह में डीपीआर तैयार करने का निर्देश दिया। उन्होंने कतरी जलाशय से शिवराजपुर डैम तक 79 किलोमीटर लंबे नहर नेटवर्क के समग्र जीर्णोद्धार पर विशेष फोकस किया। इसके अलावा मसरिया जलाशय के निरीक्षण के दौरान आसपास के गांवों को इससे जोड़कर कृषि विस्तार की संभावनाओं को मजबूत करने की बात कही। उपायुक्त ने कहा कि जल संसाधनों का संरक्षण और वैज्ञानिक प्रबंधन ही कृषि विकास की कुंजी है।

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