द फॉलोअप डेस्क:
झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) का 51वां स्थापना दिवस (51st Foundation Day) समारोह शनिवार यानी आज धनबाद में मनाया जा रहा है। धनबाद के गोल्फ ग्राउंड में कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। यहां सीएम हेमंत सोरेन (Hemant Soren) ने सभा का संबोधन करते हुए कहा कि झारखंड में 20 साल बाद पहली बार आदिवासी-मूलवासी की सरकार बनी है। संघर्ष और बलिदान झारखंडियों के किस्मत में लिखी हुई है। सरकार बनते ही कोविड-19 आ गया। उसमें सरकार के बेहतर प्रबंधन में झारखंड को बाहर निकाला। इस दौरान मजदूरों को हवाई जहाज से मंगवाया गया। 2 साल बाद जब जीवन पटरी पर लौटी तो हमने विकास को गति दी। जिसे देखकर विपक्षियों के पेट में दर्द हो रहा है।

जैसे गुरु गुरु जी लड़े,हम भी लड़ रहे
सीएम हेमंत ने आगे कहा कि जिस तरह से गुरु जी को जीवन भर कोर्ट,कचहरी का चक्कर कटवाया। उन्हें जेल भिजवाया। आज फिर वहीं हो रहा है। जैसे गुरु गुरु जी लड़े,हम भी लड़ रहे हैं। हमारी मांगों को बराबर असंवैधानिक बताया जाता है। 1932 खतियान लाया तो यूपी-बिहार के लोगों के पेट में दर्द हुआ। बात कोर्ट तक पहुंच गयी। कोर्ट जाने वाले 20 में से एक भाजपा नेता और 19 यूपी-बिहार के लोग हैं। कर्नाटक में भाजपा सरकार ने स्थानीय लोगों को नौकरी में प्राथमिकता दिया तो संवैधानिक हो गया। लेकिन झारखंड में अगर आदिवासी-मूलवासी की सरकार बने तो इसे असंवैधानिक करार दे दिया जाता है।
सरकारी कर्मी धैर्य रखें हम आपकी समस्या सुलझाएगे
कोल कंपनियों पर झारखंड का अरबों रुपये बकाया है। सबसे अधिक झारखंडी बाहर मजदूरी कर रहे हैं। वहीं बाहर के लोगों ने झारखंड को चारागाह बनाया है। सरकारी कर्मियों का भी शोषण किया। सरकारी कर्मी धैर्य रखें। सरकार आपकी समस्या सुलझाएगी। पारा शिक्षक,आंगनबाड़ी कर्मियों को सरकार ने हक दिया। हम लोग कानून बनाते हैं तो लोग जश्न मनाते हैं।

सरकार हमें एफसीआई से राशन नहीं दे रही
जाति के नाम पर सरकारी महकमे को परेशान कर रखा था। कोर्ट कचहरी सिर्फ सोरेन परिवार पर होता है। मालूम है कि सोरेन परिवार के रहते हुए उनकी दाल नहीं गलेगी। जब अपने लोगों को 5 साल नहीं चलने दिया तो हमें 5 साल रहने देगा। झारखंडियों को बोका समझता है। हम व्यापारियों के प्रतिनिधि नहीं है। महंगाई पहले डायन लगती थी,अब भुजाई लगती है। 2 लाख गरीबों का हरा राशन कार्ड हमने बनवाया। सरकार हमें एफसीआई से राशन नहीं दे रही है। बाजार से चावल खरीद कर हम गरीबों को दे रहे हैं।