द फॉलोअप डेस्क:
कॉकरोच जनता पार्टी के बैनर तले दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी छात्र आंदोलन को बड़ी सफलता मिली है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। इसे जेन-जी आंदोलन की बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है। गौरतलब है कि नीट पेपर लीक के खिलाफ दिल्ली के जंतर मंतर पर पिछले 36 दिनों से आंदोलन चल रहा था, जिसकी मुख्य मांग यही थी कि पेपर लीक की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए शिक्षा मंत्री इस्तीफा दें। आंदोलन के समर्थन में भूख हड़ताल करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का मानना था कि इस्तीफे से सरकार में जवाबदेही की शुरुआत होगी।
धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा सौंपते हुए क्या कहा!
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा सौंपते हुए कहा कि उन्होंने छात्र और राष्ट्रहित में अपना पद छोड़ने का फैसला किया है। उन्होंने तर्क दिया कि लंबे समय तक चले आंदोलन पर राष्ट्रविरोधी ताकतें हावी हो सकती थीं। धर्मेंद्र प्रधान ने ट्वीट किया है कि बच्चे कानूनी पेचीदगियों में ना फंसकर अपना ध्यान पढ़ाई और करियर में लगाएं, यही सोचकर उन्होंने इस्तीफा देने का फैसला किया है।
— Dharmendra Pradhan (@dpradhanbjp) July 25, 2026
कॉकरोच जनता पार्टी ने तीन मांगें रखी थीं
गौरतलब है कि कॉकरोच जनता पार्टी के बैनर तले इस आंदोलन में छात्र शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांग रहे थे। साथ ही उनकी मांग थी कि 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर मंतर समेत देश के बाकी हिस्सों में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मुकदमें वापस लिए जाएं और उनके खिलाफ बाद में कोई केस दर्ज ना किया जाए। सीजेपी की यह भी मांग थी कि नीट पेपर लीक के बाद जान गंवाने वाले बच्चों के परिजनों को 1-1 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाये।
इन मांगों को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी के प्रतिनिधिमंडल में शामिल प्रवक्ता आशुतोष रांका और सौरव दास तथा केंद्र सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के बीच तीन दौर की वार्ता हुई थी। सरकार ने लिखित रूप से सभी मांगें मान लीं और कॉकरोच जनता पार्टी ने तत्काल प्रभाव से अपना आंदोलन वापस लिया। गौरतलब है कि मोदी सरकार के पिछले 12 साल के कार्यकाल में यह पहला इस्तीफा है।