द फॉलोअप डेस्क
भारत में न्यायिक नियुक्ति प्रक्रिया में एक अहम बदलाव की ओर इशारा करते हुए, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने जजों की नियुक्ति से संबंधित एक नई नीति पर विचार-विमर्श शुरू किया है। इस नीति के तहत, ऐसे जजों की नियुक्ति को अस्थायी रूप से रोका जा सकता है, जो पहले से कार्यरत जजों के करीबी रिश्तेदार हैं। इस कदम का उद्देश्य न्यायपालिका में भाई-भतीजावाद की धारणा को समाप्त करना और पहली पीढ़ी के वकीलों के लिए अवसरों का विस्तार करना है।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, यह प्रस्ताव कॉलेजियम के एक वरिष्ठ न्यायाधीश द्वारा प्रस्तुत किया गया था और इसके बाद मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना और अन्य वरिष्ठ जजों के बीच इस पर चर्चा हुई। इन चर्चाओं ने न्यायपालिका में पारदर्शिता और निष्पक्षता बढ़ाने के महत्व पर जोर दिया है।
कॉलेजियम की यह पहल न केवल न्यायपालिका में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह सामाजिक विविधता और समावेशिता को भी बढ़ावा देने की कोशिश करती है। इससे न्यायपालिका पर लगे पक्षपात और भाई-भतीजावाद के आरोपों को दूर करने में मदद मिलेगी और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जजों की नियुक्ति पूरी तरह से योग्यता पर आधारित हो।
इस नई पहल का उद्देश्य विविध पृष्ठभूमियों से आने वाले प्रतिभाशाली उम्मीदवारों को प्रोत्साहित करना है, जो अब तक न्यायपालिका में कम प्रतिनिधित्व पाते रहे हैं। वर्तमान चयन प्रणाली में उम्मीदवारों की विस्तृत जांच और खुफिया रिपोर्ट शामिल होती हैं। लेकिन नया प्रस्ताव योग्यता को प्राथमिकता देने और पारिवारिक संबंधों को नियुक्ति प्रक्रिया से अलग रखने की बात करता है।
इस बदलाव के प्रभावों पर अभी बहस जारी है, लेकिन यह स्पष्ट है कि भारत की न्यायिक प्रणाली में यह प्रस्ताव एक नई दिशा की ओर संकेत करता है, जो न्यायपालिका की साख और विश्वसनीयता को मजबूत करने में सहायक होगा।