द फॉलोअप डेस्कः
कुश्ती की दुनिया में आज 2 बड़े घटनाक्रम हुए। पहला रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (WFI) को नया अध्यक्ष मिल गया. WFI के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के सहयोगी संजय सिंह नए अध्यक्ष बने हैं। दूसरा महिला पहलवान साक्षी मलिक ने आज कुश्ती से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया है। बीते एक साल से पहलवानों के साथ कथित यौन शोषण को लेकर विवादों में घिरे बृजभूषण शरण सिंह की जगह वो लेंगे। मूल रूप से वाराणसी के रहने वाले संजय सिंह को बृजभूषण का करीबी माना जाता है। दोनों करीबी दोस्त हैं। संजय सिंह बृजभूषण के बिजनेस पार्टनर हैं। मन में सवाल उठना लाजमी है कि आखिर संजय सिंह कौन हैं, जिन्हें विवाद के बाद इतनी बड़ी जिम्मेदारी दी जा रही है. आइये हम आपको उनके बारे में बताते हैं।

कब-कब क्या हुआ था
लेकिन उससे पहले याद दिलाते हैं कि एक नाबालिग सहित कम से कम सात महिला पहलवानों ने 21 अप्रैल को दिल्ली के कनॉट प्लेस पुलिस स्टेशन में भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के मौजूदा अध्यक्ष बृज भूषण शरण सिंह के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप में शिकायत दर्ज कराई थी । हालांकि, दिल्ली पुलिस ऐसा करने में विफल रही। अपनी शिकायत दर्ज कराते हुए साक्षी मलिक, विनेश फोगाट और बजरंग पुनिया सहित देश के शीर्ष पहलवानों ने 23 अप्रैल को दिल्ली के जंतर मंतर पर अपना विरोध प्रदर्शन फिर से शुरू किया था। उससे पहले जनवरी महीने में भी पहलवान इन्हीं आरोपों के साथ सड़कों पर उतरे थे और केंद्रीय खेल मंत्री अनुराग ठाकुर के हस्तक्षेप के बाद उन्होंने अपना विरोध प्रदर्शन खत्म किया था। 23 अप्रैल से जारी पहलवानों का प्रदर्शन जंतर मंतर से अब इंडिया गेट पहुंच गया था। पहलवानों का ये धरना कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ था। पहलवानों ने बृजभूषण सिंह पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाते हुए उन्हें गिरफ्तार करने की मांग की थी। जंतर मंतर पर पहलवानों के धरने से शुरू हुआ ये प्रदर्शन नार्को टेस्ट की मांग तक पहुंच गया था।

यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे
विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बजरंग पूनिया समेत तमाम पहलवान जंतर मंतर पर 23 अप्रैल से धरना दे रहे थे। इससे पहले जनवरी में पहलवानों ने बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ धरना प्रदर्शन किया था। तब पहलवानों ने बृजभूषण शरण सिंह और कोच पर महिला पहलवानों का यौन उत्पीड़न, अभद्रता, क्षेत्रवाद जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। हालांकि, खेल मंत्रालय के दखल के बाद पहलवानों ने अपना धरना खत्म कर दिया था. तब खेल मंत्रालय ने पहलवानों द्वारा लगाए जा रहे आरोपों की जांच के लिए कमेटी का गठन किया था।
28 मई के दिन पहलवान विरोध प्रदर्शन करने के लिए नए संसद भवन की तरफ जा रहे थे। पुलिस ने उन्हें रोका तो पहलवानों के साथ उनकी हाथापाई हो गई। दिल्ली पुलिस ने सभी पहलवानों और उनके समर्थकों को हिरासत में ले लिया। इसके बाद जंतर-मंतर से पहलवानों का सामान हटा दिया गया। शाम तक सभी महिला पहलवान और रात तक पुरुष पहलवानों को छोड़ दिया गया। पहलवानों को फिर से जंतर-मंतर में बैठने की अनुमति नहीं मिली, लेकिन उनका विरोध प्रदर्शन जारी रहा। इस बीच सामने आया कि बृजभूषण पर महिला पहलवानों को गलत तरीके से छूने और यौन शोषण के कई आरोप लगे हैं। इस बीच गृहमंत्री अमित शाह ने चार जून को पहलवानों के साथ बात की।
30 मई को पहलवानों ने यह एलान किया कि वह अपने सभी जीते हुए मेडल को हरिद्वार पहुंचकर गंगा नदी में बहा देंगे, तो उनके इस फैसले से पूरे देश का ध्यान उनकी तरफ खींचा चला गया। रेसलर्स गंगा घाट पहुंचे भी, लेकिन किसान नेता नरेश टिकैत ने उनके मेडल ले लिए और उन्हें समझाया। साथ ही सरकार को 5 दिन का अल्टीमेटम भी दे दिया। इन सब के बीच अब रेसलिंग के सबसे बड़े संगठन यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग ने भी कह दिया था कि अगर 45 दिनों के भीतर भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के चुनाव नहीं हुए तो WFI को आगे के मैच के लिए सस्पेंड किया जा सकता है।

5 जून को धरना वापस हो गया
पांच जून को सभी बड़े पहलवानों ने अपनी सरकारी नौकरी जॉइन कर ली। साक्षी मलिक ने कहा कि वह प्रदर्शन से पीछे नहीं हटी हैं, बल्कि अपनी जिम्मेदारी को निभा रही हैं। इंसाफ के लिए उनकी लड़ाई जारी है। 15 जून को दिल्ली पुलिस ने अपनी चार्जशीट अदालत में पेश की। नाबालिग पहलवान की शिकायत पर पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज एफआईआर वापस हुई। अन्य छह महिला पहलवानों के आरोप पर भी बृजभूषण के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं मिले। बृजभूषण को क्लीन चिट मिलने का रास्ता साफ हो गया। हालांकि बाद में साक्षी मलिक ने ट्वीट किया था कि ये लड़ाई जारी रहेगी।

संजय सिंह का परिचय देते हुए बताते हैं कि संजय सिंह अपने प्रतिद्वंदी अनीता श्योराण को मात देते हुए भारतीय कुश्ती संघ का अध्यक्ष बने हैं। वो 2008 से कुश्ती से जुड़े हैं। 2009 में बृजभूषण जब यूपी कुश्ती संघ के अध्यक्ष बने थे तब संजय वहां उपाध्यक्ष थे। संजय सिंह की शिक्षा काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में हुई। बचपन से ही संजय कुश्ती से जुड़े रहे हैं। उनके दादा कन्हैया सिंह बनारस में हर महाशिवरात्रि पर बहुत बड़ा कुश्ती का दंगल कराते थे। उनके परिवार में कई पहलवानों ने जन्म दिया, जिसमें मंगला राय का नाम भी शामिल है। इस समय वो वाराणसी में अपने परिवार के साथ रहते हैं. संजय सिंह बबलू पिछले डेढ़ दशक से भी ज्यादा समय से कुश्ती संघ से जुड़े हैं और बृजभूषण शरण सिंह के काफी नजदीकी माने जाते हैं. वो 2008 से ही वाराणसी कुश्ती संघ के जिला अध्यक्ष हैं. संजय सिंह बबलू का 2009 में प्रदेश कुश्ती संघ के उपाध्यक्ष के रूप में चयन हुआ था। संजय सिंह ने अपनी बड़ी जीत के बाद मीडिया से कहा कि यह देश के उन हजारों पहलवानों की जीत है जिन्होंने पिछले 7-8 महीनों में नुकसान उठाया है। फेडरेशन के भीतर राजनीति के बारे में पूछे जाने पर संजय ने कहा, ''हम राजनीति का जवाब राजनीति से और कुश्ती का जवाब कुश्ती से देंगे.''

आसानी से संजय सिंह को जीत मिली
देर से हुए डब्ल्यूएफआई चुनाव में संजय सिंह के पैनल ने ज्यादातर पदों पर आसानी से जीत हासिल की है. भारतीय कुश्ती महासंघ के गुरुवार (21 दिसंबर) को हुए चुनाव में संजय सिंह को 40 वोट मिले, जबकि उनकी प्रतिद्वंद्वी अनीता श्योराण को सात वोट मिले। संजय सिंह को जीत मिलते ही गुरुवार को साक्षी मलिक, बजरंग पूनिया और विनेश फोगाट मीडिया के सामने काफी भावुक नजर आए. साक्षी मलिक ने कहा, ''...एक बात और कहना चाहूंगी कि लड़ाई लड़ी, पूरे दिल से लड़ी लेकिन अगर प्रेसिडेंट बृजभूषण जैसे आदमी ही रहता है जो उसका बिजनेस पार्टनर है, वो अगर इस फेडरेशन में रहेगा को मैं अपनी कुश्ती को त्यागती हूं...'' उन्होंने कहा कि देशवासियों को धन्यवाद जिन्होंने आजतक इतना सपोर्ट किया और मुझे इस मुकाम तक पहुंचाया।''