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खांसी-बुखार को न करें नजरअंदाज, देश में तेजी से बढ़ रहा फ्लू का खतरा, ICMR ने दी ये बड़ी चेतावनी

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द फॉलोअप डेस्क
अभी तो लोगों ने खुद को कोरोना के डर से मुक्त कर खुल कर जीना शुरू ही किया था। इसी बीच कोरोना जैसे मिलते-जुलते वायरल ने दस्तक दे दी है। कोरोना महामारी के बाद अब फ्लू के बढ़ते मामलों ने लोगों ने डरा दिया है। बता दें कि पिछले दो महीने से राजधानी दिल्ली समेत भारत के कई हिस्सों में इन्फ्लूएंजा का मामाला तेजी से बढ़ रहा है। ICMR की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले दो-तीन महीनों से इन्फ्लूएंजा वायरस का एक सब-टाइप एच3एन2 (H3N2) फैल रहा है। देश के कई हिस्सों में लोगों में इसी स्ट्रेन के लक्षण मिले हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि बाकी सब-टाइप्स की तुलना में इस वैरिएंट की वजह से लोग अस्पतालों में ज्यादा भर्ती होते हैं।


H3N2 वायरस के लक्षण
आपको बता दें कि आईसीएमआर ( ICMR),  देश भर में अपने वायरस रिसर्च एंड डायग्नोस्टिक लेबोरेटरीज के नेटवर्क के जरिए वायरस से होने वाली बीमारियों पर नजर बनाएं रखता है। आईसीएमआर में महामारी विज्ञान की प्रमुख डॉ निवेदिता के मुताबिक 15 दिसंबर से अब तक 30 वीआरडीएलएस के डाटा ने इंफ्लूएंजा ए एच2एन2 ( H3N2) के मामलों की संख्या में तेजी रिकॉर्ड की है। ICMR के मुताबिक अस्पताल में भर्ती ए3एन2 ( H3N2) मरीजों में 92 फ़ीसदी मरीजों में बुखार, 86 फ़ीसदी मरीजों को खांसी, 27 फ़ीसदी को सांस फूलना, 16 फ़ीसदी को घबराहट की समस्या देखी गई। इसके अलावा आईसीएमआर ने निगरानी में पाया गया कि ऐसे ही 16 फ़ीसदी रोगियों को निमोनिया था और 6 फ़ीसदी लोगों को दौरे पड़ते थे। आईसीएमआर के मुताबिक ( H3N2) वायरस से पीड़ित पेशेंट में से लगभग 10 फ़ीसदी रोगियों को ऑक्सीजन की जरूरत होती है और 7 फ़ीसदी को आईसीयू में देखभाल की जरूरत होती है।

एंटीबायटिक के इस्तेमाल से बचें : IMA
आईसीएमआर के मुताबिक एच3एन2 ( H3N2) वायरस की चपेट में आने वालों को हाई फीवर हो सकता है। ठंड और कपकपी हो सकती है। तेज बुखार आता है और लगातार खांसी बनी रह सकती है। ये खांसी आम नहीं है ये कई दिनों तक परेशान कर सकती है। इस में खराश से लेकर आवाज में खरखराहट हो सकती है। IMA के मुताबक इस समस्या से पीड़ित लोगों को एंटीबायटिक के ज्यादा इस्तेमाल से बचना चाहिए और डॉक्टर के संपर्क में बने रहना चाहिए। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने डॉक्टरों को इसके लिए एंटीबायोटिक लिखने से परहेज करने को कहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि मार्च के आखिर या अप्रैल के पहले हफ्ते में वायरस का असर कम होने की संभावना है। 


ऐसे करें बचाव
 नियमित रूप से हाथ धोने और सार्वजनिक जगह पर हाथ मिलाने और थूकने से बचे
आंख और नाक को छूने से बचें
खांसते समय मुंह पर और नाक को कवर कर लें
घर से बाहर निकलते वक्त मास्क का लगाना जरूरी है
प्रदूषण वाली जगहों पर जाने से बचें
तरल पदार्थों का ज्यादा से ज्यादा सेवन करें
बॉडी पेन या बुखार होने पर पेरासिटामोल लें