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राहुल गांधी पर चुनाव आयोग का हमला, कहा- 7 दिन में हलफनामा दें या देश से माफी मांगें

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द फॉलोअप डेस्क

देश में मतदाता सूची और चुनावी पारदर्शिता को लेकर एक बार फिर सियासी घमासान तेज़ हो गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बड़ा बयान देते हुए उन लोगों पर निशाना साधा जो विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि "कुछ लोग गुमराह कर रहे हैं कि यह प्रक्रिया इतनी जल्दी में क्यों की जा रही है? क्या मतदाता सूची का सुधार चुनाव से पहले होना चाहिए या बाद में? चुनाव आयोग नहीं, बल्कि ‘जन प्रतिनिधित्व अधिनियम’ यह कहता है कि हर चुनाव से पहले मतदाता सूची का पुनरीक्षण होना कानूनी ज़िम्मेदारी है।" उन्होंने राहुल गांधी का नाम लिये बिना कहा कि भ्रम फैलाने वाले 7 दिन में हलफनामा दें या देश से माफी मांगें। 
मुख्य चुनाव आयुक्त ने बिहार का उदाहरण देते हुए बताया कि 24 जून से यह काम शुरू हुआ और लगभग 20 जुलाई तक पूरी प्रक्रिया पूरी कर ली गई। उन्होंने कहा कि सात करोड़ से ज़्यादा मतदाताओं तक पहुंचने का लक्ष्य सफलतापूर्वक पूरा किया गया।
वहीं, EPIC (मतदाता पहचान पत्र) की डुप्लीकेसी को लेकर उठे सवालों पर उन्होंने दो प्रकार की गड़बड़ियों को स्पष्ट किया। पहले प्रकार में दो अलग-अलग लोगों को एक ही EPIC नंबर मिला था, जिसे आयोग ने मार्च 2025 में देशभर में सुधारते हुए करीब तीन लाख मामलों को ठीक किया। दूसरे प्रकार में एक ही व्यक्ति का नाम कई जगहों पर दर्ज था और उसके अलग-अलग EPIC नंबर थे, जो 2003 से पहले की तकनीकी कमियों की वजह से हुआ।
ज्ञानेश कुमार ने यह भी चेताया कि यदि इस प्रक्रिया में जल्दबाज़ी दिखाई जाए तो किसी का नाम ग़लती से हट सकता है, और किसी और का नाम आपकी जगह हट सकता है। उन्होंने कहा, “चुनाव आयोग मतदाताओं के साथ चट्टान की तरह खड़ा है और पारदर्शिता व निष्पक्षता के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा।”
विपक्ष का निशाना या गलतफहमी?
बिना किसी का नाम लिए ज्ञानेश कुमार का इशारा साफ तौर पर उन राजनीतिक बयानों की ओर था, जिनमें मतदाता सूची में गड़बड़ी और SIR प्रक्रिया की टाइमिंग पर सवाल उठाए गए हैं। राहुल गांधी के हालिया बयानों को लेकर आयोग ने अप्रत्यक्ष रूप से यह संदेश दिया है कि तथ्यों के बिना भ्रम फैलाना उचित नहीं, और यदि ऐसे आरोप लगते हैं तो या तो कानूनी हलफनामा पेश किया जाए या फिर सार्वजनिक माफी मांगी जाए।
यह बयान ऐसे समय आया है जब देश में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियां जोरों पर हैं, और चुनाव आयोग किसी भी तरह की शंका या अविश्वास को समाप्त करने की कोशिश में जुटा है।
 

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