द फॉलोअप डेस्क
'हिंदी बोलने वाले बिहारी टॉयलेट साफ करते हैं', DMK सांसद दयानिधि मारन के इस बयान ने बिहार और यूपी सहित पूरे देश में सियासी पारा बढा दिया है। मारन के इस बयान से उत्तर और दक्षिण भारत के बीच भाषाई मुद्दा एक बार फिर से सुर्खियों में आता दिखाई दे रहा है। हालांकि DMK सुप्रीमो एमके स्टालिन अपने नेताओं को बार-बार ऐसे बयान देने से बचने की सलाह देते रहे हैं। इसके बाद भी मारन ने ऐसा बयान देकर हलचल मचा दिया है। इससे पहले DMK के ही सांसद सेंथिल कुमार ने संसद के शीतकालीन सत्र में उत्तर भारतीयों को लेकर विवादित बयान दिया था।
मारन ने की हिंदी और अंग्रेजी बोलने वालों की तुलना
मिली खबर के मुताबिक, DMK सांसद मारन ने ये बयान एक शैक्षणिक समारोह में दिया। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी पढ़ने वाले लोग आईटी और मल्टीनेशनल कंपनियों में नौकरी करते हैं। वहीं, हिंदी पढ़ने वाले लोग जो बिहार और यूपी से तमिलनाडु आते हैं, वे सड़क और टॉयलेट की सफाई में लग जाते हैं। कहा कि हिंदी बोलने वालों को उन्होंने अक्सर ऐसा ही करते देखा है। समारोह में वे अपने अनुभव शेयर कर रहे थे। साथ ही मारन ने कहा, ऐसे राज्यों की सरकारों को अपने यहां शैक्षणिक स्तर को सुधारना चाहिये। ये सरकारों की जिम्मेदारी बनती है कि उनके लोग क्या बोल रहे हैं। क्या पढ़ रहे हैं।

पहले भी आ चुके हैं विवादित बयान
बता दें कि हाल ही में, संसद के शीतकालीन सत्र में DMK के सांसद सेंथिल कुमार ने एक सवाल के जवाब में हिंदी भाषियों के लिए विवादित बयान दिया था। इस पर संसद में कड़ी आपत्ति दर्ज की गयी थी। सेंथिल के बाद रेवंथ रेड्डी ने तेलंगाना के डीएनए की तुलना बिहार के डीएनए से की थी। इस दौरान उन्होंने तेलंगाना के डीएनए को उच्च श्रेणी का डीएनए बताया था। इस बयान पर सियासी बवाल मचा था। अब दयानिधि मारन के बयान से सियासी घमासान मचा हुआ है। बता दें कि DMK इंडिया गठबंधन का हिस्सा है, जिसमें यूपी और बिहार सहित अन्य हिंदी भाषी राज्यों की पार्टियां शामिल हैं।
