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कैसे हुआ शिबू सोरेन का निधन, किडनी, डायबिटीज, हृदय रोग या ब्रेन स्ट्रोक बना बहाना

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रांची

झारखंड की राजनीति में आदिवासी चेतना के सबसे प्रभावशाली प्रतीकों में से एक, झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक और तीन बार के मुख्यमंत्री रहे शिबू सोरेन अब नहीं रहे। उन्हें उनके अनुयायी ‘दिशोम गुरु’ यानी ‘जनजातीयों के गुरु’ कहकर संबोधित करते थे। लेकिन बीते कुछ वर्षों से उनका जीवन अस्पतालों और इलाज के बीच सिमट गया था।
4 अगस्त 2025 की सुबह 8:56 बजे, दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। वे लंबे समय से कई गंभीर बीमारियों से पीड़ित थे, जिनमें पुरानी किडनी फेल्योर, डायबिटीज, हृदय रोग, और अंततः ब्रेन स्ट्रोक प्रमुख रहे। 81 वर्षीय शिबू सोरेन का स्वास्थ्य पिछले कुछ वर्षों से लगातार गिरता जा रहा था और अंतिम दो महीने उन्होंने गहन चिकित्सा निगरानी में ICU में बिताए। वह लगभग दो महीने तक 19 जून 2025 से नेफ्रोलॉजी विभाग में भर्ती थे। 

1. पुरानी किडनी रोग एवं डायलिसिस
लगभग एक साल से शिबू सोरेन किडनी की गंभीर बीमारी से ग्रस्त थे और नियमित डायलिसिस पर थे। 

जून 2025 की शुरुआत में किडनी की स्थिति बिगड़ने पर उन्हें दिल्ली लाया गया और 19 जून 2025 से सर गंगाराम अस्पताल में एडमिट किया गया। 

2. मधुमेह (डायबिटीज)
वे मधुमेह के भी मरीज थे, जिससे उनकी समग्र स्वास्थ्य स्थिति और जटिल बनी रही। 

3. हृदय रोग एवं बायपास सर्जरी
हृदय संबंधी समस्याएँ भी थीं, और पहले ही हार्ट बायपास सर्जरी हो चुकी थी। यह उनकी गंभीर स्वास्थ्य स्थितियों में शामिल थी। 

4. ब्रेन स्ट्रोक एवं पैरालिसिस
अस्पताल में भर्ती होने के बाद उन्हें ब्रेन स्ट्रोक हुआ, जिससे शरीर का बायाँ हिस्सा बेहोश हो गया और पैरालिसिस हो गई (बाएं अंग काम नहीं कर रहे थे)। 

स्ट्रोक के ठीक बाद पहले चार दिन वह वेंटिलेटर सपोर्ट पर थे। स्थिति चिंताजनक बनी रही। 

5. चिकित्सकीय निगरानी और सुधार की अवधि
न्यूरोलॉजी, कार्डियोलॉजी और नेफ्रोलॉजी की टीम ने संयुक्त रूप से देखभाल की। विदेशी विशेषज्ञों से वीडियो‑कॉल पर परामर्श भी लिया गया। 

शुरू में गंभीर हालत के बावजूद एक सप्ताह बाद उन्होंने आँखें खोली और सुधार के संकेत मिले। लेकिन जुलाई में मामूली सुधार के बाद अगस्त की शुरुआत में स्थिति फिर से बिगड़ गई। 

इन कई जटिल बीमारियों, किडनी फेल्योर (डायलिसिस पर), मधुमेह, हृदय रोग और ब्रेन स्ट्रोक ने मिलकर शिबू सोरेन की स्वास्थ्य गिरावट को गंभीर बना दिया। डॉक्टरों की अथक कोशिशों और परामर्शों के बावजूद 4 अगस्त 2025 को सुबह 8:56 बजे उनका निधन हो गया। 

उनके बेटे और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने यह कहकर शोक व्यक्त किया, “आज मैं शून्य हो गया हूं। गुरुजी हम सबको छोड़कर चले गए।”

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