द फॉलोअप डेस्क
असम में नाबालिग बेटी को गरीब मां-बाप ने सेना के मेजर के यहां ये सोचकर नौकरी पर रखा था कि बेटी को सम्मान के साथ दो वक्त की रोटी मिल सकेगी। लेकिन उन्हें क्या पता था कि उनकी बेटी के साथ किस हद की दरिंदगी हो रही थी। मिली खबर के मुताबिक नाबालिग को मेजर की पत्नी बेरहमी से पीटती थी। पिटाई में नाबालिग के दांत टूट गये हैं। नाबालिग को जलाने की भी कोशिश मेजर की पत्नी ने की है। उसकी जीभ पर भी चोट के निशान हैं और मडिकल रिपोर्ट में बताया गया है कि नाबालिग की नाक की हड्डी टूट गयी है। असम पुलिस का कहना है कि नाबालिग को पहनने के लिए भी कपड़े नहीं दिये जाते थे। नाबालिग की मानें तो उसके साथ छह महीने से ये दरिंदगी की जा रही थी। अधिकतर समय उसे भूखे रहना पड़ता था। खाना मांगने पर मेजर की पत्नी उसे डस्टबीन से फेंका हुआ खाना निकालकर देती थी। गुस्सा होने पर मेजर की पत्नी उसे तब तक पिटती रहती थी जब तक कि उसके शऱीर से खून न बहने लगे। बच्ची ने यह भी आरोप लगाया है कि उसे उसके शरीर से निकले खून को चाटने के लिए विवश किया जाता था। पूछने पर मेजर की पत्नी का कहना था कि उसे घर का काम करना नहीं आता था। नाबालिग द्वारा पिटाई का विरोध करने पर उसे कमरे में बंद करके छोड़ दिया जाता था।

मां पहचान नहीं पायी बेटी को
मामले की जानकारी देते हुए दिमा हासाओ के पुलिस कप्तान ने कहा कि नाबालिग को छह महीन से यातना दी जा रही थी। बता दें कि सेना के इस मेजर की पोस्टिंग पालमपुर में है, जो कि हिमाचल प्रदेश में है। जब वो वापस अपने स्थाई निवास असम आये तो तब बच्ची किसी तरह अपने मां-बाप से मिल सकी। इसके बाद इस दरिंदगी के बारे में लोगों को पता चला। नाबालिग की मां ने रोते हुए कहा कि वो अपनी बेटी को देखकर पहचान नहीं पा रही थी। 16 साल की उम्र में वो महिला की तरह दिखाई दे रही थी। मामला खुलने के बाद मेजर की आरोपी पत्नी के खिलाफ पॉक्सो और एससी-एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
