द फॉलोअप डेस्क
झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितता और धांधली से जुड़े मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। JPSC की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2025 और JSSC CGL परीक्षा की जांच CBI से कराने की मांग को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने केंद्र सरकार, झारखंड सरकार, JPSC और JSSC को नोटिस जारी किया है।
मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने की। याचिका सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन की ओर से अधिवक्ता सत्यम सिंह राजपूत के माध्यम से दाखिल की गई है।

नोटिस के बाद सरकार और आयोगों का पक्ष आएगा, फिर कार्रवाई तय होगी
याचिका में JPSC की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के आयोजन और उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है। याचिकाकर्ता का दावा है कि परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हुए हैं और पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की जरूरत है।
याचिका में परीक्षा को रद्द कर नए सिरे से निष्पक्ष परीक्षा आयोजित कराने की मांग की गई है। साथ ही मामले की स्वतंत्र, व्यापक और समयबद्ध जांच CBI से कराने का अनुरोध सुप्रीम कोर्ट से किया गया है। सुप्रीम कोर्ट की ओर से नोटिस जारी होने के बाद अब राज्य सरकार के साथ JPSC और JSSC का पक्ष भी इस मामले में सामने आएगा। इसके बाद अदालत यह तय करेगी कि मामले में आगे किस दिशा में कार्रवाई की जाएगी।