द फॉलोअप डेस्क
इंलेक्ट्रॉनिक सामान को यूज करते हुए कभी भी उसे चार्ज नहीं करना चाहिए। खासकर मोबाइल फोन को।ऐसे हमें कई बार कहा जा चुका है। लेकिन हम में से अधिकांश लोग यही गलती करते हैं। ज्यादातर लोग मोबाइल का इस्तेमाल करते हुए उसे चार्जिंग पॉइंट में लगाए रहते हैं। लेकिन ऐसा करना बिलकुल भी सुरक्षित नहीं होता है। कई बार हम ने ऐसी घटनाओं के बारे में पढ़ा-सुना है, जहां मोबाइल को इस्तेमाल करने के दौरान ही हादसे हो जाते हैं। कुछ हादसों में तो इंसान की जान भी चली जाती है। वहीं कई घटनाओं में गंभीर चोट आ जाती है। लेकिन इन खबरों के बावजूद भी हम सबक नहीं लेते हैं। नतीजा होता है कि इंसान को आगे इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है। इन दिनों सोशल मीडिया पर एक ऐसे ही हादसे का वीडियो शेयर किया गया। इसमें एक बुजुर्ग घर में चार्जिंग पर लगे मोबाइल फोन पर बात कर रहे थे। इसी दौरान उसमें ब्लास्ट हुआ, जिससे बुजुर्ग के सिर से लेकर सीने तक के चीथड़े उड़ गए।

दोस्त ने किया कॉल फोन बंद
मामला मध्यप्रदेश के उज्जैन का है। 68 साल के बुजुर्ग दयाराम बारोड़ का फोन चार्ज में लगा था। जानकारी के अनुसार सोमवार को दयाराम को अपने दोस्त दिनेश चावड़ा के साथ किसी काम को लेकर इंदौर जाना था। दिनेश स्टेशन पहुंचे। उन्होंने अपने औऱ अपने दोस्त के लिए टिकट खरीदा। काफी देर इंतजार करने के बाद जब दयाराम नहीं पहुंचे तो दिनेश ने उन्हें फॉन किया। फोन रिसीव होती ही फोन बंद आने लगा। दिनेश ने काफी बार कोशिश की लेकिन फोन नहीं लगा। उन्हें खतरे की आशंका हो गई थी। आनन-फानन में वो अपने दोस्त के घर की ओर भागे। वहां का नाजार देख कर वो दंग रह गए। घर के बारे लोगों की भीड़ और पुलिस की गाड़ी देख वो तुरंत अंदर भागे तो पुलिस ने उन्हें घटना की जानकारी दी।

अकेले रहता था बुजुर्ग
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार बुजुर्ग का गर्दन से लेकर सीने तक का हिस्सा और एक हाथ पूरी तरह से उड़ा मिला। प्रथम दृष्ट्या जांच में पता चला कि कोई विस्फोट हुआ है। घटनास्थल पर ओप्पो कंपनी का मोबाइल फोन डिस्मेंटल कंडीशन में मिला है। बिजली पॉइंट भी पूरी तरह जला हुआ था। मौके पर अन्य कोई विस्फोटक या ज्वलनशील सामग्री भी नहीं मिली है। थाना प्रभारी मनीष मिश्रा ने बताया कि मोबाइल ब्लास्ट होने से ही बुजुर्ग की मौत होने की आशंका है। शव को पीएम करवाकर परिजनों को सौंपा है। बुजुर्ग खेती किसानी करते थे। पत्नी की मृत्यु के बाद से ही बच्चों से नहीं बनती थी, इसलिए वे खेत पर ही बने कमरे में अकेले रहते थे।
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