द फॉलोअप डेस्क:
नेपाल के शालिग्रामी नदी से निकाली दोनों शिलाएं नेपाल पहुंच चुकी है। गुरुवार सुबह रामसेवक पुरम में 51 वैदिक ब्राह्मणों ने शिलाओं का पूजन किया। इसके बाद नेपाल के पूर्व उपप्रधानमंत्री विमलेंद्र निधि और जानकी मंदिर के महंत तपेश्वर दास ने चंपत राय को शालिग्राम शिलाएं सौंप दी। इन्हीं शिलाओं से भगवान राम और माता सीता की मूर्ति बनाई जाएंगी। जो राम दरबार में स्थापित होगी। दोनों शिलाओं का वजन 40 टन है।

संत समाज काफी उत्साहित
स्थानीय संत रविदास बताते हैं कि इस शिला को साक्षात् भगवान विष्णु का अवतार मानते हैं। नेपाल की गंडकी नदी में यह सिला मिलती है। इसके हर एक पत्थर को शालिग्राम कहा जाता है। हर मठ मंदिरों में इस पत्थर का भगवान के रूप में पूजा किया जाता है। बिटिया जब ससुराल जाती है तो मायके के लोग सौगात में कुछ ना कुछ देते हैं। ऐसे में जनकपुर से यह शिला आयी है। अयोध्यावासी प्रसन्न हैं, प्रफुल्लित हैं। वहीं, संत समाज काफी उत्साहित है।
देशभर से आयोध्या पहुंचे लोग
नेपाल से चलकर लगभग 6 दिनों की यात्रा कर बुधवार देर रात शालिग्राम शिला रामसेवक पुरम में पहुंची। सैकड़ों सालों के बाद अयोध्या जगमहा उठी है। इस शालिग्राम के दर्शन करने के लिए लोग देशभर से आयोध्या पहुंचे हैं। रामनगरी में आज चारों तरफ 'सजा दो घर को गुलशन सा मेरे सरकार आए हैं' की धुन की धूम है। 'शालिग्राम शिला' को देख अयोध्या का संत समाज हों या फिर राम भक्त, हर कोई अभिभूत नजर आ रहा है।

26 जनवरी को नेपाल से निकली थी शिलाएं
राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और विश्व हिंदू परिषद एक साल से इन शिलाओं को लाने का प्रयास कर रही थी। नेपाल के जनकपुर में काली नदी से ये पत्थर निकाले गए थे। अभिषेक और विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद ये शिलाएं 26 जनवरी को ट्रक में लोड की गई है। 30 जनवरी को ये शिलाएं नेपाल-भारत की सीमा पर स्थित मधुबनी जिले के शहरगांव स्थान पर भारत में प्रवेश किया। मधुबनी से लेकर मुजफ्फरपुर तक में 27 स्थानों पर स्वागत की तैयारी की गई थी। 31 जनवरी को गोपालगंज होते उत्तर प्रदेश पहुंची। वहां से अयोध्या के लिए सभी लोग रवाना हुआ औऱ बुधवार रात पहुंचा। आयोध्या राम मंदिर दिसंबर 2023 तक बनकर तैयार हो जाने का अनुमान है। जनवरी 2024 को मकर संक्राति के अवसर पर भगवान राम की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा की जा सकती है।